
Jharkhand: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संरक्षक और झारखंड की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ शिबू सोरेन का सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। 81 वर्षीय ‘गुरुजी’ पिछले डेढ़ महीने से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से झारखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
सोमवार को उनका पार्थिव शरीर रांची लाया गया, जहां हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। आज (मंगलवार) उनका पार्थिव शरीर झारखंड विधानसभा में आम जनता और नेताओं के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार रामगढ़ जिले में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
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Jharkhand: राजनीति में संघर्ष का दूसरा नाम थे शिबू सोरेन
शिबू सोरेन को झारखंड में ‘गुरुजी’ के नाम से पहचाना जाता था। (Jharkhand) वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पदभार संभाल चुके थे और लोकसभा में कई बार झारखंड की बुलंद आवाज बने। उन्होंने आदिवासी अधिकारों, वनभूमि और स्थानीयता के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर एक जननेता की छवि बनाई। झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।

शोक में डूबा राजनीतिक जगत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शिबू सोरेन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया। (Jharkhand) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी, अमित शाह सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें ‘जनता के नेता’ और ‘संघर्षशील योद्धा’ बताया।
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JMM कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक
झारखंड मुक्ति मोर्चा के हजारों कार्यकर्ता और समर्थक आज ‘गुरुजी’ को अंतिम विदाई देने के लिए रामगढ़ पहुंच रहे हैं। पूरे राज्य में शोक की स्थिति है और सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। पूरे राज्य में सरकार ने शिबू सोरेन के सम्मान में दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।














