Twisha Sharma Death Case: भोपाल में 33 साल की कॉरपोरेट प्रोफेशनल और पूर्व अभिनेत्री Twisha Sharma की संदिग्ध मौत के मामले में आज 25 मई यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की खास पीठ ने मामले को बहुत ही संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसे सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।
इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मीडिया और दोनों पक्षों के परिजन सार्वजनिक रूप से बयान देने से बचें। (Twisha Sharma Death Case) अदालत ने कहा कि चल रही जांच पर किसी भी तरह का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। कोर्ट ने परिवारों से अपील की कि वे मीडिया इंटरव्यू देने के बजाय जांच एजेंसियों के सामने अपना पक्ष रखें।
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Twisha Sharma Death Case: क्या है ये पूरा मामला ?
दरअसल, Twisha Sharma 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फांसी से लटकी हुई मिली थीं। इस घटना के बाद मृतका के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर रूप से बड़े आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और दहेज को लेकर भी प्रताड़ित किया जा रहा था। (Twisha Sharma Death Case) वहीं, ससुराल पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल (SG) ने बताया कि अब इस पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह जांच में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। दूसरी तरफ, ट्विशा परिवार की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने मामला दर्ज करने में देरी और शुरुआती जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किये।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की भी प्रशंसा की। खासतौर से दूसरे पोस्टमॉर्टम कराने के निर्णय को अदालत ने “सराहनीय कदम” बताया। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा CBI जांच की सिफारिश किए जाने को भी कोर्ट ने सकारात्मक कदम माना।
गंभीर बिंदुओं का भी उल्लेख
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखे गए नोट में इस बात का भी जिक्र किया गया कि मृतका की सास एक रिटायर्ड जिला जज हैं। (Twisha Sharma Death Case) इसी आधार पर मामले को संस्थागत स्तर पर दबाने के आरोप लगाए गए हैं। नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज मांग और कथित संस्थागत कवर-अप जैसे गंभीर बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया।
बता दे, सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ संकेत दिए हैं कि इस मामले में जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी तथा किसी भी पक्ष को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।














