UP CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि गौर किया जाए तो बीते कुछ सालों में किसी चेहरे ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है, तो वह हैं मुख्यमंत्री श्री Yogi Adityanath। एक वक्त वो भी था जब योगी जी संसद में भावुक होकर अपनी बात को रखा था, और आज भगवा वस्त्रधारी सांसद से लेकर आज “जीरो टॉलरेंस” (zero tolerance) नीति वाले मुख्यमंत्री तक का उनका सफर लगातार जमकर सुर्खियों में रहा है।
हिंदुत्व, सख्त प्रशासन, बुलडोजर एक्शन और कानून व्यवस्था को लेकर उनकी शैली ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अलग पहचान दिलाई है।
UP CM Yogi Adityanath: गोरखनाथ मठ से सीधा UP की ‘सत्ता’ तक का सफर
योगी आदित्यनाथ का रजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जी हां, गोरखनाथ मठ से निकलकर उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ पहले हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक, फिर गोरखपुर से कई बार सांसद बने और बाद में प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक शैली विकसित की। (UP CM Yogi Adityanath) उनके समर्थक उन्हें सख्त प्रशासक स्पष्ट बताते हैं, जबकि विरोधी उनके बयानों और निर्णयों को लेकर गंभीर रूप से सवाल खड़े करे हैं।
“कड़क प्रशासन” आज भी चर्चा का विषय
योगी आदित्यनाथ की छवि सबसे ज्यादा उनके “कड़क प्रशासन” को लेकर चर्चा में रही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की बागडोर अपने हाथ में लेने के बाद उन्होंने कानून व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता दी। लगातार माफियाओं पर कार्रवाई, अवैध कब्जों पर बुलडोजर अभियान और अपराधियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख ने उन्हें “बुलडोजर बाबा” के रूप में पहचान दिलाई। यही सबसे बड़ा कारण है कि यूपी से बाहर भी उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ती गई।
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BJP के बने सबसे चर्चित ‘स्टार प्रचारक’
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने खुद को केवल एक मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रखा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक मजबूत और दमदार चेहरे के रूप में खुद को स्थापित किया। इधर बीते कुछ दिनों में गौर किया जाए तो… बंगाल, बिहार, असम और अन्य राज्यों के चुनावों में BJP के ‘स्टार प्रचारक’ के रूप में उनकी लगातार मौजूदगी ने उनकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता को बढ़ाया। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है।
योगी आदित्यनाथ की राजनीति का मुख्य फोकस
हालांकि, योगी आदित्यनाथ की राजनीति सिर्फ सख्त प्रशासन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गौ आधारित योजनाओं और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को भी प्रमुखता दी। प्रदेश में नंद बाबा दुग्ध मिशन और गोवर्धन योजना जैसी पहलें लगातार चर्चा में रहीं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी है और किसानों को अतिरिक्त फायदा भी पहुंचा है।
इतना ही नहीं, गोबर से जैविक खाद, CNG और अन्य उत्पाद बनाने की पहल को भी सरकार ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता से जोड़ा।
कोरोना महामारी में भी रही CM योगी की चर्चा
कोरोना महामारी के दौरान भी CM योगी सरकार काफी चर्चा में रहे थे। जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, उस समय लाखों प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश वापस लौटे आये थे। उस दौरान सरकार ने राहत शिविर, भोजन और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं को लेकर बड़े स्तर पर कार्य किया। हालांकि, उस दौरान कई व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर रूप से आलोचनाएं भी हुईं, लेकिन समर्थकों ने इसे बड़े संकट में प्रशासनिक नियंत्रण का उदाहरण बताया।
गौर किया जाए तो… योगी आदित्यनाथ का व्यक्तित्व सिर्फ सख्त बयानों तक सीमित नहीं ही नहीं है। विधानसभा में कई मौकों पर उनका हल्का-फुल्का अंदाज भी देखने को कई बार मिला है। समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ उनकी नोकझोंक और ठहाकों वाले वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते रहे हैं। यही वजह है कि समर्थक उन्हें “सख्त लेकिन जमीन से जुड़ा नेता” बताते हैं।
राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ी पहचान
राम मंदिर आंदोलन से उनका जुड़ाव भी उनकी राजनीतिक पहचान का बड़ा भाग माना जाता है। अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ के साथ उन्होंने अयोध्या आंदोलन में बेहद सक्रियता से भूमिका निभाई थी। बाद में राम मंदिर निर्माण के बाद उनकी राजनीतिक छवि और मजबूत हुई। BJP के अंदर भी उन्हें हिंदुत्व के बड़े चेहरों में गिना जाता है।
साल 2024 लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की चर्चा तेज हुई, लेकिन इसके बावजूद योगी आदित्यनाथ लगातार अपने पुराने तेवर में ही नज़र आये। उनके भाषणों और राजनीतिक शैली में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का मुद्दा हमेशा से ही प्रमुखता रहा। यही कारण है कि भाजपा समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें भविष्य में राष्ट्रीय नेतृत्व के संभावित चेहरे के रूप में भी देखता है।
क्या है राजनीतिक विश्लेषकों की राय ?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ ने अपने समर्थकों के बीच “सख्त प्रशासक” और “निर्णायक नेता” की जो छवि बनाई है, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक फैसलों तक उनकी शैली निरंतर बड़ी चर्चा का विषय बनी रहती है।
और आज… योगी आदित्यनाथ सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा नाम बन चुके हैं। संसद में भावुक होकर बोलने वाले सांसद से लेकर पूरे देश में सब से चर्चित मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर भारतीय राजनीति की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक माना जा रहा है।















