UP Power Crisis: उत्तर प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच बढ़ते बिजली संकट से लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में लगातार हो रही कटौती को लेकर सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। यूपी की राजधानी लखनऊ से लेकर राज्य के छोटे जनपदों में भी बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसके कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बिजली संकट की समस्या को गंभीरता से लिया और उन्होंने खुद कमान संभाल ली है। (UP Power Crisis) रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग और पावर कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अफसरों की बैठक बुलायी। जिसमें मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन, आपूर्ति और वितरण की पूरी स्थिति की गहनता के साथ समीक्षा की। सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि आने वाले दिनों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत मिल सके।
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UP Power Crisis: आम जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति की जाए
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग के अफसरों को निर्देश देते हुए कि राज्य में किसी भी वर्ग को बिजली संकट का सामना नहीं करना चाहिए। आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति की जाए। इसके लिए सभी स्तरों पर लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत है। (UP Power Crisis) मुख्यमंत्री ने फीडर वाइज निगरानी करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए। साथ ही सभी बिजली संयंत्रों में तकनीकी दक्षता और रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी से बचा जा सके।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक और भरोसेमंद बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता बेहद जरूरी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गर्मी के मौसम में ट्रांसमिशन नेटवर्क की लगातार निगरानी की जाए और तकनीकी बाधाओं को न्यूनतम रखा जाए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो चुकी है। (UP Power Crisis) इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों से 9,120 मेगावाट बिजली उत्पादन शामिल है। वहीं जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से राज्य को 3,742 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन क्षमता में लगभग 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।
प्रदेश में बिजली मांग में हुई बढ़ोतरी
बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में पिछले वर्ष की तुलना में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके कारण प्रदेश में बिजली मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड मेट 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गया, जबकि पीक डिमांड मेट 29,831 मेगावाट से बढ़कर 30,339 मेगावाट तक पहुंच गया। बैठक में बताया गया कि 20, 21 और 22 मई को उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा। (UP Power Crisis) मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुरूप विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि 15 मई से विभिन्न पावर प्लांटों में अलग-अलग कारणों से बिजली उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन द्वारा 12 राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर विशेष बल दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2015 से 2026 के बीच प्रदेश ने कुल 32,305 मेगावाट की विद्युत क्षमता के लिए टाई-अप किए हैं, जिनमें पिछले तीन वर्षों में लगभग 62 प्रतिशत क्षमता जोड़ी गई है। वर्ष 2029 तक मांग को पूरा करने के लिए 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिसमें विंड, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि नवंबर 2025 से नई एकीकृत 1912 कॉल सेंटर व्यवस्था लागू की गई है।
लखनऊ और नोएडा केंद्रों से कॉल लोड बैलेंसिंग के साथ व्यवस्था संचालित हो रही है। नई प्रणाली के तहत कॉल हैंडलिंग क्षमता बढ़ाकर 75 हजार से 90 हजार प्रतिदिन कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के माननीय मंत्री अरविंद कुमार शर्मा एवं राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। (UP Power Crisis) उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर केवल समस्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संवाद और पारदर्शिता से उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा तथा शिकायतों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को उपभोक्ता हितैषी बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था को उपभोक्ता हितैषी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। राज्य सरकार के निर्देशानुसार सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को पूर्व की भांति पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया है। जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के बिल प्रत्येक माह की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड आधार पर जारी किए जाएंगे। (UP Power Crisis) उपभोक्ताओं को एसएमएस व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से बिल उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही 15 मई से 30 जून तक प्रदेशभर में विशेष कैंप आयोजित कर स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बिलिंग और कलेक्शन एफिशिएंसी को और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि आमजन के जीवन, किसानों की सिंचाई, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास से जुड़ा विषय है। उन्होंने निर्देश दिए कि फील्ड अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। (UP Power Crisis) साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को गर्मी के मौसम में पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी डिस्कॉम मिलकर इसे पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुुई बैठक में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत, ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।














