
Jagdeep Dhankhar: भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष की भूमिका निभाने वाले जगदीप घनखड़ का कार्यकाल विवादों और आरोपों से घिरा रहा है। विपक्ष उन पर पक्षपात तथा संसदीय प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगता रहा। दिसंबर 2024 में विपक्षी दलों, खासकर इंडिया अलायन्स ने धनखड़ के खिलाफ मोशन ऑफ़ नॉन‑कंफिडेंस दाखिल किया, जिसमें दावा किया गया कि वे संसदीय अध्यक्ष के रूप में पूरी तरह पक्षपातपूर्ण व्यवहार करते रहे हैं – वे विपक्ष के सदस्यों को बोलने नहीं देते, नियम 267 अनुरोधों को नकारते हैं, जबकि सत्ताधारी सांसदों को हर चीज में अनुमति दे देते हैं।
आरोप लगाया गया कि विशेषकर 9 से 11 दिसंबर 2024 की कार्यवाही के दौरान उन्होंने सीधे भाजपा सांसदों को बोलने दिया, जबकि विपक्ष के अनुरोधों को अस्वीकार किया गया। विपक्ष का आरोप था कि विपक्षी सदस्यों को दुर्व्यवहारकारी टिप्पणियाँ करने के लिए उकसाया गया। विपक्ष ने धनखड़ को राज्य सभा की गरिमा को गिराने वाला बताया।
Jagdeep Dhankhar: सार्वजनिक बयान का विवाद
अगस्त 2024 में कांग्रेस सांसद जया बच्चन ने आरोप लगाया कि धनखड़ का “टोन और बॉडी‑लैंग्वेज” उनके लिए अस्वीकार्य थी। (Jagdeep Dhankhar) इसी घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। जून 2025 में वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया की धनखड़ ने न्यायपालिका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया, मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्यवाही रोकने की कोशिश की, और यह हरकत एक पक्षपातपूर्ण क़दम था।अप्रैल 2025 में सिब्बल ने घनखड़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की आलोचना किये जाने पर आपत्ति जताई।
हाल ही में 21 जुलाई के एक मामले में, राज्यसभा में उच्च न्यायालय के एक जज के खिलाफ लाये प्रस्ताव में एक सदस्य के दोहरे हस्ताक्षर पाए जाने पर धनखड़ ने इसे “गंभीर” लापरवाही बताया और जांच का आग्रह किया था। (Jagdeep Dhankhar) इसमें विपक्ष ने फिर आरोप लगाया कि वे समय‑समय पर नियमों को एकतरफा लागू करते हैं और विपक्षी प्रस्तावों को खारिज कर सत्ता पक्ष के नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं।
आरोप लगाया गया कि विशेषकर 9 से 11 दिसंबर 2024 की कार्यवाही के दौरान उन्होंने सीधे भाजपा सांसदों को बोलने दिया, जबकि विपक्ष के अनुरोधों को अस्वीकार किया गया। (Jagdeep Dhankhar) विपक्ष का आरोप था कि विपक्षी सदस्यों को दुर्व्यवहारकारी टिप्पणियाँ करने के लिए उकसाया गया। विपक्ष ने धनखड़ को राज्य सभा की गरिमा को गिराने वाला बताया।
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सार्वजनिक बयान का विवाद
अगस्त 2024 में कांग्रेस सांसद जया बच्चन ने आरोप लगाया कि धनखड़ का “टोन और बॉडी‑लैंग्वेज” उनके लिए अस्वीकार्य थी। इसी घटना ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। (Jagdeep Dhankhar) जून 2025 में वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया की धनखड़ ने न्यायपालिका के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया, मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्यवाही रोकने की कोशिश की, और यह हरकत एक पक्षपातपूर्ण क़दम था।अप्रैल 2025 में सिब्बल ने घनखड़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की आलोचना किये जाने पर आपत्ति जताई।
हाल ही में 21 जुलाई के एक मामले में, राज्यसभा में उच्च न्यायालय के एक जज के खिलाफ लाये प्रस्ताव में एक सदस्य के दोहरे हस्ताक्षर पाए जाने पर धनखड़ ने इसे “गंभीर” लापरवाही बताया और जांच का आग्रह किया था। इसमें विपक्ष ने फिर आरोप लगाया कि वे समय‑समय पर नियमों को एकतरफा लागू करते हैं और विपक्षी प्रस्तावों को खारिज कर सत्ता पक्ष के नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं।









