अंबेडकरनगर : जाति-धर्म को भूल महंगाई से राहत देने वाली हो सरकार

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अंबेडकरनगर : विधानसभा चुनाव के बीच राजनीति का पारा चढ़ चुका है। किसान खेतों में तो व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों पर सरकार बना रहे हैं। मतदाता कहीं उत्साहित तो कहीं पूरी तरह शांत हैं। आमजन इस बार जाति-धर्म का भेद समाप्त कर सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार बनाने के मूड में है।
रविवार को मीडिया की टीम अकबरपुर शहर से पांच किलोमीटर दूर कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के डोमनेपुर गांव स्थित चाय की दुकान पर पहुंची। यहां जिले के सबसे कम उम्र के प्रधान प्रेम मिश्रा ग्रामीणों के साथ चुनावी चर्चा में जुटे थे। प्रधान ने कहा, गांव में 225 लोग गरीब हैं, लेकिन बहुत सी योजनाओं के लिए पात्र होने के बावजूद उनको अपात्र कर दिया जाता है। हम सब उसी को वोट देंगे, जो हमारे गांव को आधुनिक गांव बनाने में मदद करेगा।

इसी दौरान 100 वर्ष के जेठू दादा भी लाठी के सहारे पहुंचे और चर्चा में शामिल हो गए। पूछने पर बताया कि कितनी बार वोट दिहन ई तो ध्यान नाय बाय। लकिन वोट वही का देब जवन गांव क विकास में मदद कै भरोसा देये। सत्यनरायन ने कहा, पहले सरकारी कार्यालयों में 10 रुपया होने पर भी काम हो जाता था, लेकिन अब 100 रुपया भी कम पड़ गया है। पुलिस बिना रिश्वत के सुनती नहीं। खाद की बोरी पिछले पांच साल में 270 से बढ़कर 370 रुपये हो गई है। उनकी बात काटते हुए राजेंद्र प्रसाद बोले, हम तो खुश हैं। तभी विजयपाल ने छुट्टा जानवरों से फसलें बर्बाद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे निजात के लिए हर गांव में गोआश्रय केंद्र खुले, तभी किसानों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि 50 किलो की खाद की बोरी 45 किलो की कर दी गई, लेकिन उसके दाम कम होने के बजाए बढ़ गए। इससे किसानों की कमर टूट रही है। किसानों को खाद, डीजल, बिजली के दामों में रियायत मिलने पर ही देश का विकास संभव है।

रिपोर्ट : अंजलि गोस्वामी 

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