अंबेडकरनगर : पवित्र सरयू नदी में लगातार बढ़ रहा प्रदूषण टांडा विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के लिए कभी मुद्दा नहीं बन पाया। सरयू नदी के तट पर बसे टांडा नगर की पहचान बुनकर उद्योग से है। इसके चलते टांडा में बड़े पैमाने पर पावर लूम संचालित हैं। यहां कपड़े तैयार करने तथा रंगाई आदि का कार्य होता है। इन कारखानों से निकलने वाला केमिकलयुक्त गंदा पानी सीधे सरयू नदी की जलधारा में पहुंचता है। टांडा नगर क्षेत्र में करीब एक दर्जन स्थानों पर नालों के माध्यम से कचरायुक्त पानी सरयू नदी में पहुंच रहा है। इसका खामियाजा न सिर्फ हजारों श्रद्धालुओं को विभिन्न पवित्र घाटों पर भुगतना पड़ता है, बल्कि नदी के अंदर मौजूद जलीय जीवों के लिए भी यह खतरा बनता है। आम नागरिक व श्रद्धालु अक्सर इसे लेकर आवाज उठाते रहते हैं। लंबे समय से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट यानि एसटीपी लगाने की मांग चली आ रही है, लेकिन इस तरफ ध्यान नही दिया जा रहा है। विभिन्न चुनावों में प्रत्याशी भी इसे विकट समस्या मानते हैं। फिर यह कभी किसी प्रत्याशी का चुनावी मुद्दा नहीं बना। इसके चलते ही लगातार सरयू नदी प्रदूषण का शिकार होती जा रही है। टांडा नगर के आस पास के क्षेत्रों में कई जगह स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। इसके बावजूद इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।टांडा नगर क्षेत्र में सरयू नदी की जलधारा लगातार प्रदूषण का शिकार होती जा रही है। नगर पालिका प्रशासन की मनमानी व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा ने टांडा नगर के विभिन्न पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं व जीव-जंतुओं के लिए मुश्किल खड़ा कर दिया है।
सरयू नदी के तट पर बसा टांडा नगर बुनकर उद्योग के लिए जाना जाता है। बड़ी संख्या में पावरलूम नगर में स्थापित हैं। बड़े पैमाने पर कपड़ों के निर्माण व रंगाई का कार्य होता है। धागों की रंगाई में प्रयुक्त होने वाला केमिकल्स विभिन्न नालों के माध्यम से सीधे सरयू में पहुंचता है। इससे न सिर्फ नालों के इर्द गिर्द नदी में प्रदूषण फैला रहता है, बल्कि 12 से अधिक स्थानों पर नाले सीधे नदी में जाकर गिरते हैं। इसके चलते कई किलोमीटर तक सरयू नदी का पानी दूषित रहता है।सबसे ज्यादा मुश्किल नगर के विभिन्न पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं को स्नान पूजन करने में होती है। पानी में मौजूद जलीय जीवों पर भी खतरा उत्पन्न रहता है। टांडा नगर के वाशिंदे लगातार सरयू को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए एसटीपी यानि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग कर रहे हैं। चुनावों में यह मांग और तेज भी होती है, लेकिन प्रत्याशी सिर्फ आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर लेते हैं। दशकों से चली आ रही इस समस्या को कभी किसी प्रत्याशी ने अपना मुद्दा नही बनाया। इसके चलते ही सरयू नदी लगातार प्रदूषण का दंश झेल रही है, और इसका खामियाजा बेजुबान जीव-जंतुओं के साथ ही आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
नगर के प्रसिद्ध श्रीहनुमान गढ़ी घाट व धार्मिक स्थल राजघाट पर पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और स्नान-पूजन का दौर चलता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाने आते हैं। दोनों तरफ नगर का मुख्य नाला इसी नदी में आकर मिलता है। नदी का जलस्तर जब तक बढ़ा रहता है, तब तक तो यहां गंदगी कम दिखाई पड़ती है, लेकिन जलस्तर कम होने पर सारी गंदगी इकट्ठा हो जाती है। मांझा क्षेत्र के जानवर, नदी के जीव-जंतु तथा पवित्र सरयू में स्नान करने वाले सामान्य जन पर पानी के विषैले हो जाने से स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ सकता है।
ऐसा नहीं है कि प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को इस प्रदूषण की जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बाद भी आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते ही लगातार नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। युवा साहित्यकार अजय प्रताप श्रीवास्तव, अधिवक्ता संघ के महामंत्री शैलेंद्र उपाध्याय, समाजसेवी इंद्रदेव पाठक, मनोज साहू, यूथ आईकॉन प्रवीण कुमार गुप्त, व्यापारी नेता पिंटू जायसवाल आदि ने सरयू को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की मांग की है। कहा कि सरयू नदी को प्रदूषण से बचाने के साथ ही आम नागरिकों व जीव-जंतुओं के हितों का ख्याल रखने की जरूरत है।
रिपोर्ट: अंजलि गोस्वामी









