. अखिलेश यादव के दांव से बढ़ी BJP की मुश्किल, 21 साल बाद कमल खिलाने वाले का काटा टिकट

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यूपी विधानसभा चुनाव  में समाजवादी पार्टी के गढ़ में कमल खिलाने के प्रयास में जुटी भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. पार्टी को वर्ष 2017 में 21 साल बाद जिले की एक मात्र सीट फूलपुर पवई पर अरुणकांत यादव  ने कमल तो खिला दिया, लेकिन वर्ष 2022 में उनके पिता बाहुबली रमाकांत यादव  को समाजवादी पार्टी ने इसी सीट से टिकट दे दिया, जिससे भाजपा को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है. भारतीय जनता पार्टी के इकलौते विधायक अरुणकांत यादव विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे. भाजपा विधायक का कहना है कि वे पार्टी में ही रहेंगे, लेकिन विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे, क्‍योंकि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें एमएलसी का चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है.

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 1996 के विधानसभा में अंतिम बार लालगंज सीट जीती थी. नरेंद्र सिंह ने सुखदेव राजभर को हराकर विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद जिले में हुए सभी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फूलपुर पवई से अरुणकांत यादव को टिकट दिया और उन्‍होंने इस सीट पर न केवल बड़ी जीत हासिल की बल्कि जिले में पिछले 21 वर्षों से मुरझाए कमल को खिला दिया.

इस बार अरुणकांत के पिता रमाकांत यादव को समाजवादी पार्टी ने इसी विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया है. पुत्र की सीट पर पिता की दावेदारी ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. पार्टी ने पिता और पुत्र आमने-सामने न हो इसके लिए रणनीति को बदल दिया. पार्टी ने अब अरुणकांत को इस सीट से लड़ाने का फैसला बदल दिया है.

भाजपा इस सीट से अब नये उम्मीदवार की तलाश कर रही है, जो बाहुबली रमाकांत यादव को कड़ी टक्कर दे सकें. सूत्र बता रहे हैं कि सपा के बागी स्याम बहादुर यादव भाजपा का दामन थाम सकते हैं और पार्टी रमाकांत के सामने उन्हें मैदान में उतार सकती है. वहीं, विधायक अरुणकांत यादव का कहना है कि उनकी सीट से उनके पिता ने सपा से टिकट मिल गया है, जिसके कारण पार्टी ने उनको इस सीट से लड़ने से मना कर दिया है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि उन्हें एमएलसी का चुनाव लड़ाया जायेगा

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