अयोध्या : जयप्रकाश ने रचा इत‍िहास, लिफाफे बेचकर की ट्रेनि‍ंग; मास्टर्स एथलेटिक्स में जीता स्‍वर्ण पदक

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अयोध्या : जिसने विपदाओं से हार नहीं मानी, उसने ही सफलता का स्वाद चखा। अयोध्या के रेटिया निवासी जयप्रकाश सि‍ंह गरीबी में पले-बढ़े। खेल की प्रति लगन ऐसी कि लिफाफे बनाकर भी बेचे। पेट की आग बुझाने को लंगर का सहारा लिया। इसके बावजूद मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने इतिहास रच दिया। ओमान की राजधानी मस्कट में हो रही मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शनिवार को जयप्रकाश सि‍ंह ने वाक रेस में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने पुरुषों की 35 से 39 आयुवर्ग की मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में यह स्वर्ण पदक जीता। मास्टर्स एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया की ओर से हिस्सा लेने वाले जयप्रकाश ने यूपी को पहली बार गोल्ड दिलाया। इससे पहले बनारस की नीलू ने ब्रांज जीता था।

पिता जगदम्बा प्रसाद के कहने पर जयप्रकाश ने वर्ष 1999 में गांव में बने अखाड़े में कदम रखा। हालांकि, एथलेटिक्स में रुझान होने के कारण महज दो वर्ष बाद ही पहलवानी से दूर हो गए। वर्ष 2001-04 तक जयप्रकाश राजकीय स्टेडियम फैजाबाद अयोध्या में एथलेटिक्स कोच रहे राकेश शर्मा से जुड़े रहे। इसके बाद एक चैंपियनशिप में जयप्रकाश की मुलाकात एथलेटिक्स के कोच रहे मानसि‍ंह से हुई। मान सि‍ंह 2004 से लेकर 2008 तक उनको निखारने में जुटे रहे। इस दौरान जयप्रकाश ने स्टेट लेवल की कई प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया।

हालांकि, एड़ी में लगी चोट के कारण वह 2008 से 2014 तक किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके। इससे निराश जयप्रकाश ने 2014 में पंजाब का रुख किया। यहां उनका सहारा बने बाबा धर्म सि‍ंह। बाबा के घर में रहते हुए जयप्रकाश लिफाफा बनाकर बेचते थे। इससे मिले पैसों से खाना, जूता व किट खरीदते थे। इस दौरान कई बार ऐसा हुआ जब जयप्रकाश के पास न तो पैसे होते थे और न ही खाने को रोटी तो वह गुरुद्वारे में जाकर अपना पेट भरते थे। जयप्रकाश यहां पर दो साल गुजारने के बाद भोपाल चले गए। यहां पर सुरेंद्र पाल से इन्होंने ट्रेनि‍ंग ली।

वर्ष 2016 में जयपुर में एक ट्रायल चल रहा था। इससे रियो ओलिंपिक का टिकट मिलना था, लेकिन इस ट्रायल में जयप्रकाश आठवें नंबर पर आए। जयप्रकाश ने बताया कि देश के लिए पदक जीतने का सपना शुरू से था, लेकिन पीछे रह गए। इसके बाद 2018 में फिर से वर्ल्‍ड पियनशिप के लिए जुट गए। यहां भी कुछ सकारात्मक परिणाम नहीं आए। वर्ष 2019 में चेन्नई में हुई चैंपियनशिप में भी अच्‍छी तैयारी थी, लेकिन चयन नहीं हुआ। लगातार तीन बार नकारात्मक परिणाम आने के बाद थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन हार नहीं मानी और 2020 -21 में लगातार जमकर अभ्यास किया। इसका परिणाम यह हुआ कि हमने मास्टर ग्रुप में गोल्ड जीत लिया।

 

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