लखनऊ: भाजपा ने उत्तर प्रदेश में गैर-यादव ओबीसी के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए बीते मंगलवार को ओबीसी सम्मेलनों या बैठकों की एक श्रृंखला शुरू की. इन बैठकों का समापन 18 सितंबर को अयोध्या में एक विशाल सभा में होगा. इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के सदस्यों ने कहा कि बैठकों के दौरान, भाजपा राज्य और केंद्र में अपनी सरकारों द्वारा ओबीसी के लिए किए गए कार्यों के बारे में बात करेगी।
यह पहल मोदी मंत्रिपरिषद में हाल ही में शामिल किए गए केंद्रीय मंत्रियों की जन-आशीर्वाद यात्रा के तुरंत बाद शुरू की गयी है, जिसका उद्देश्य ओबीसी के बीच उन जातियों तक पहुंचना था, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है. ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल ब्राह्मण सम्मेलनों में व्यस्त हैं, भाजपा ने अपना ध्यान ओबीसी समुदाय पर बढ़ा दिया है. मेरठ के अलावा दो, तीन और चार सितंबर को क्रमश: अयोध्या, कानपुर और मथुरा में लगातार तीन बैठकें होंगी. उसके बाद आठ सितंबर को काशी में और नौ सितंबर को गोरखपुर में एक और बैठक होगी।
कैडर को संगठित कर रहे
बीजेपी ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप ने बताया, “हम इन बैठकों के जरिये सभी विधानसभा सीटों पर ओबीसी मोर्चा के अपने कैडर को संगठित कर रहे हैं, ताकि एक बार फिर अगला विधानसभा चुनाव जीत सकें. इन बैठकों के जरिये हम अयोध्या में 18 सितंबर को होने वाली कार्यकारिणी की बैठक की भी तैयारी कर रहे हैं.” अयोध्या में बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और अन्य नेता शामिल होंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी न्योता भेजा जा रहा है।









