बिजली एक बार फिर आगामी गर्मी में रुला सकती है। क्योंकि बिजली को लेकर होने वाली तैयारियां आज भी अधूरी हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर जो कार्य होने थे, आज भी अधूरे हैं। गोमती नगर से लेकर पुराने लखनऊ के बिजली उपकेंद्र पूरी क्षमता से चल रहे हैं। अगर किसी बिजली उपकेंद्र को सौ किलोवॉट का लोड अतिरिक्त देना पड़ जाए तो अभियंताओं को जुगाड़ पद्धति से देना पड़ रहा है। ऐसे में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई नहीं गई है और न ही नए बिजली उपकेंद्र बन सके हैं। ऐसे में आगामी गर्मी के दौरान बिजली का गुल खिलाना तय है। वहीं मार्च मध्य तक बिजली की डिमांड बढ़नी तय मानी जा रह ट्रांसफार्मर की लोड बैलेंसिंग के साथ ही आयल डालने का काम हो या फिर अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाने का काम, आज तक अधूरा है। वहीं राजधानी में नए उपकेंद्र का निर्माण कार्य पिछले चार सालों में कुछ नहीं हुआ। अमीनाबाद, पालीटेक्निक, विक्रमादित्य मार्ग, बिजनौर, गोमती नगर सहित आधा दर्जन से अधिक बिजली उपकेंद्रों का काम अधूरा है। ट्रांसमिशन लाइनें जरूर बनी, लेकिन राजधानी के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी बिजली उपकेंद्र आज तक डबल सोर्स से लैस नहीं हो पाए हैं। पुराने लखनऊ के अंतर्गत आने वाले खंडों में बिजली की डिमांड बढ़ते ही बिजली चोरी फिर शुरू हो गई है।









