लखनऊ। घर में कोई नहीं है, बाद में आइएगा। घर में सिर्फ महिलाएं हैं, इसलिए हम आपको घर में आने नहीं देंगे, मेरे पति शाम को आफिस से आएंगे, तब आइएगा। यह जुमले अब बीते समय की बात होगी। अमूमन बिजली चोरी करने वाले लोग कटिया लगाने के बाद जब पकड़े जाते हैं तो अपने परिसर में इन बातों का बहाना बताकर बिजली कर्मियों को घुसने नहीं देते। अब यह बहाने नहीं चलेंगे।
बिजली विभाग ऐसे चोरों से निपटने के लिए ड्रोन कैमरे का प्रयोग करने जा रही है। कैमरे में पुष्टि होने के बाद संबंधित बिजली चोर को दिखाकर तब परिसर में प्रवेश किया जाएगा। इतना ही नहीं महिला कांस्टेबल भी कार्रवाई के दौरान साथ रहेंगी जो बिजली चोरों से निपटने के लिए पूरी घटनाक्रम का वीडियो भी बनवाएंगी। इस पूरी प्रकिया को ऊपर वाला सब देख रहा है, नाम देने की तैयारी है।
मोहनलालगंज के अवर अभियंता राजेश कुमार द्वारा ड्रोन कैमरे से बिजली चोरी पकड़ने के बाद इस पर बिजली विभाग ने काम करना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष एम देवराज ने इस पर नीति बनाने का निर्णय किया है। तब तक स्थानीय स्तर पर अभियंता ड्रोन का उपयोग अपने स्तर पर करना चाहे तो कर सकते हैं। इस प्रकिया से लाइन लास जो बिजली चोरी में होता है, उस पर अंकुश लगेगा।
यही नहीं मार्निंग रेड और देर रात बिजली अभियान में भी ड्रोन कैमरे का प्रयोग करने की तैयारी है। पुराने लखनऊ के अमीनाबाद खंड, ठाकुरगंज, रेजीडेंसी, चौक, अपट्रान, ऐशबाग सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रयोग करने की पहले तैयारी है। यहां बिजली संकट सबसे अधिक बिजली चोरी होने के कारण होता है। इस प्रकिया से चोरी की पुष्टि होने के बाद अभियंता व टीम बिजली चोर को कैमरे में उसकी करतूतें दिखाने के बाद घर में प्रवेश करेगी और रंगे हाथ पकड़ेंगे। इस प्रकिया से बिजली चोर अब बच नहीं सकेंगे।
एक खंड में तीन से छह बिजली उपकेंद्र होते हैं। अब हर बिजली उपकेंद्र में ड्रोन दिया जाए या फिर एक खंड में एक ड्रोन कैमरा। यही नहीं स्थानीय स्तर पर इसे किराए पर लेने की संभावना ज्यादा है। क्योंकि ड्रोन कैमरा चलाने के लिए कोई अभियंता प्रशिक्षित नहीं है। ऐसे में किराए के लिए क्या दरें होनी चाहिए, उसको लेकर काम होगा। जल्द ही इस पर निर्णय होने की उम्मीद है। यह प्रयोग यूपी के सभी डिस्काम पर लागू हो सकता है।









