Cyclone Arnab Alert: बंगाल की खाड़ी से उठे अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। लैंडफॉल के दौरान 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा के झोंके चले, जिससे कई स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। सड़कों पर जलभराव हो गया और बिजली व संचार सेवाएं प्रभावित हुईं। कच्चे मकानों तथा खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात ने बुधवार तड़के दो बजे से सुबह आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार किया। सुबह आठ बजे तक इसका केंद्रीय हिस्सा पूरी तरह जमीन पर पहुंच चुका था। हालांकि, तट पार करने के बाद तूफान कमजोर पड़ने लगा है, लेकिन आंध्र प्रदेश, ओडिशा और देश के कई अन्य राज्यों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है।
आंध्र प्रदेश में भारी नुकसान, जनहानि के आंकड़े पर स्थिति स्पष्ट नहीं
चक्रवात से काकीनाडा, कोनासीमा और आसपास के तटीय इलाकों में व्यापक नुकसान की खबरें सामने आई हैं। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण सैकड़ों पेड़ गिर गए, जबकि बिजली के खंभे उखड़ने से कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। सड़कों पर पेड़ और मलबा गिरने से आवागमन प्रभावित हुआ।
बुधवार दोपहर तक की कुछ मीडिया रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। विशाखापत्तनम में करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई। हालांकि, अलग-अलग समाचार एजेंसियों और प्रशासनिक सूचनाओं में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में उस समय तक किसी मौत की पुष्टि नहीं की गई थी। ऐसे में जनहानि का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट होने का इंतजार है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। बिजली आपूर्ति बहाल करने, सड़कों से पेड़ हटाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए टीमें तैनात की गई हैं।
150 किमी/घंटे तक पहुंचे हवा के झोंके, IMD ने की लैंडफॉल की पुष्टि
मौसम विभाग के मुताबिक, लैंडफॉल के समय चक्रवात के केंद्र के आसपास लगातार हवाओं की गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जबकि तेज झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे।
चक्रवात का केंद्र नरसापुर से लगभग 20 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व, यानम से 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम के आसपास तट से गुजरा।
लैंडफॉल के बाद तूफान अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी से कमजोर होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया। IMD के शुरुआती आकलन के अनुसार, इसकी गति घटने लगी थी और अगले 48 घंटों में उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए इसके धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना थी।
हालांकि, चक्रवात की हवाएं कमजोर पड़ने का अर्थ यह नहीं है कि बारिश का खतरा भी तत्काल समाप्त हो जाएगा। इसके साथ आई नमी और बादलों का समूह आंतरिक क्षेत्रों में पहुंचकर भारी वर्षा करा सकता है।
1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
चक्रवात के तट से टकराने से पहले ही आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्यों में मिलाकर 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश में 89 हजार से अधिक लोगों को निकाले जाने की जानकारी दी गई थी। राज्य के 20 जिलों में दो हजार से अधिक राहत शिविरों की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा करीब 30 हजार मछली पकड़ने वाली नावों को सुरक्षित किया गया और लगभग 1,100 चिकित्सा दल तैनात किए गए।
तूफान का असर रेल और हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 64 रेलगाड़ियां रद्द की गईं। विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और अन्य हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं। कई इलाकों में स्कूल भी बंद रखे गए।
ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी, दक्षिणी जिलों पर नजर
आंध्र प्रदेश के बाद ओडिशा में भी चक्रवात से जुड़ी बारिश का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई गई। बुधवार दोपहर राज्य के विशेष राहत आयुक्त ने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर कहा था कि चक्रवाती प्रणाली शाम या रात तक मलकानगिरि जिले की ओर बढ़ सकती है।
भुवनेश्वर मौसम केंद्र के बुधवार शाम जारी बुलेटिन में दक्षिणी ओडिशा के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका जताई गई थी। समुद्र की स्थिति खराब रहने के कारण बंदरगाहों पर चेतावनी संकेत जारी रखने की सलाह भी दी गई।
प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारी बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में समय पर राहत पहुंचाना है।
यूपी, बिहार और झारखंड में 29 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट
चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बावजूद इससे जुड़ी मौसम प्रणाली देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश करा सकती है। बुधवार शाम तक जारी पूर्वानुमानों के अनुसार, गुरुवार, 29 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई थी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को व्यापक वर्षा की संभावना व्यक्त की गई। बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी भारी वर्षा का खतरा बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। किसानों के लिए भी मौसम चुनौतीपूर्ण रह सकता है, क्योंकि धान की कटाई और खेतों में रखी फसलों को बारिश से नुकसान पहुंचने की आशंका है।
हालांकि, यूपी में आंध्र प्रदेश जैसी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की चक्रवाती हवाओं का पूर्वानुमान नहीं था। यहां मुख्य चिंता भारी बारिश, गरज-चमक और स्थानीय स्तर पर तेज हवाओं को लेकर है।
दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में ओलावृष्टि की आशंका
उत्तर भारत के मौसम पर पश्चिमी विक्षोभ का भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई। बुधवार शाम के पूर्वानुमानों के अनुसार, दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में गुरुवार को कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि हो सकती है।
इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई थी। पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में भी ओले गिरने की आशंका जताई गई।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में संभावित बारिश और ओलावृष्टि को केवल चक्रवात अर्नब से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी वायुमंडलीय परिस्थितियां भी मौसम में बदलाव का कारण बन सकती हैं।
कमजोर पड़ा चक्रवात, लेकिन राहत कार्य और बारिश की चुनौती बरकरार
चक्रवात अर्नब का लैंडफॉल पूरा होने के बाद उसकी तीव्रता में कमी आई है। इसके बावजूद आंध्र प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाओं की बहाली, सड़कों की सफाई, फसल क्षति का आकलन और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
बड़ी संख्या में लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने से बचाव कार्यों में मदद मिली है। अब राहत शिविरों में रह रहे लोगों की सुरक्षित वापसी और प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
निष्कर्ष: 28 अक्टूबर की रात तक उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट को पार कर चुका था और कमजोर पड़ रहा था।
लैंडफॉल के दौरान 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक हवा के झोंके चलने की पुष्टि मौसम विभाग के आकलन में हुई। हालांकि, नुकसान और जनहानि का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा स्पष्ट नहीं था। अगले 24 से 48 घंटे में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।









