केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने लगाया गंभीर आरोप कहा- वे किसान नहीं मवाली हैं

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कोरोना काल में संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने भी अपना आंदोलन तेज कर दिया है। संसद के सामने प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलने के बाद किसान संगठन के नेताओं ने सीमित संख्या में जंतर-मंतर में सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। किसान आंदोलन को लेकर केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने एक विवादित बयान दिया है जिसको लेकर मामला गरमा सकता है।

कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर निशाना साधते हुए गुरुवार को केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, ‘वे किसान नहीं मवाली हैं। इसका संज्ञान भी लेना चाहिए, ये आपराधिक गतिविधियां हैं, जो कुछ 26 जनवरी को हुआ वो भी शर्मनाक था, आपराधिक गतिविधियां थी, उसमें विपक्ष द्वारा ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया गया।’ मीनाक्षी के इस बयान के कुछ देर बाद ही किसान नेता राकेश टिकैत ने भी पलटवार किया।

राकेश टिकैत ने कहा, ‘मवाली नहीं किसान हैं, किसान के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। किसान देश का अन्नदाता है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का ये भी एक तरीका है। जब तक संसद चलेगी हम यहां आते रहेंगे। सरकार चाहेगी तो बातचीत शुरू हो जाएगी।’ इस बीच जंतर-मंतर में जारी ‘किसानों की संसद’ में कथित तौर पर मीडियाकर्मी पर हुए हमले को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने दुख जताया। उन्होंने कहा, ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर देश भर से जानकारी इकट्ठा करने की बड़ी जिम्मेदारी है। अगर किसी कैमरापर्सन को पीटा गया है, तो ऐसा नहीं होना चाहिए था और मैं इसकी निंदा करता हूं। यह दुखद है।

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