क्या चीनी मिल बर्बादी की दास्तां लिख रहे चीफ इंजीनियर

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निघासन खीरी पेराई सत्र 2019-20 में बार-2 चीनी मिल के बन्द होने व लगातार घाटे से जूझ रही चीनी मिल बेलरायां की बर्बादी की दास्तां कौन लिख रहा है।मजबूर होकर किसानों का एक दल मिल बचाओ अभियान के तहत मिल में फैले भृष्टाचार के कारण मिल को बर्बाद होने से बचाने के लिए मुख्य गन्ना आयुक्त उत्तरप्रदेश सरकार व निदेशक चीनी मिल संघ लखनऊ व जिला मुख्य गन्ना अधिकारी लखीमपुर को भेजे पत्र में मिल अधिकारियों द्वारा ब्याप्त भृष्टाचार की जांच की मांग की है।

सरजू सहकारी चीनी मिल में ब्याप्त कमीशन खोरी तो जग जाहिर है लेकिन मिल बन्द होने की कगार पर पहुंच जाए तो मिल से जुड़े किसान व इलाके के लोगों में चिंता होना जाहिर है,आज सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां हजारों करोड़ के घाटे में पहुंचते हुए बन्द होने की कगार पर पहुंच चुकी है।हांलाकि पूर्व में रहे मिल उपाध्यक्ष अमनदीप सिंह और किसानों ने चालू सत्र में मिल के बार-2 बन्द होने से आक्रोशित होते हुए चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार का घेराव कर कारण पूछा तो चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार ने बायलर की चैन टूटने व उसमें लगी रैकों के खराब होने की बात स्वीकार की जबकि बन्दी सीजन में ठेकेदारों के द्वारा भारी भरकम बिल देकर ठेकेदारों से रिपेयर का कार्य कराया गया या फिर कार्य कराया ही नही गया खाली बिलिंग की गई।

नाराज किसान धनीराम वर्मा,देवेन्द्र वर्मा,शुनील कुमार, रामपाल,छेद्दु लाल,रमहेत, डॉ संजय वर्मा,कपिल वर्मा सहित तमाम किसानों ने मिल बचाओ अभियान के तहत मुख्य गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश सरकार जिला मुख्य गन्ना अधिकारी, व निदेशक चीनी मिल संघ लखनऊ को पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए मिल में ब्याप्त भृष्टाचार जिसमें सप्लायरों व ठेकेदारों की मिलीभगत से सस्ती सल्फर,चूना, केमिकल, बिजली व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित रिपेयरिंग मेंटिनेंस के ठेकेदारों संग मिलकर फर्जी बिलिंग कर मिल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसकी जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराए जाने की मांग की है।

सूबे की भाजपा सरकार ने भृष्टाचार के तिलस्म को तोड़ने के लिए सहकारी मिलों में पीसीएस जीएम की नियुक्ति की थी बेलरायां चीनी मिल में पीसीएस जीएम शुशील कुमार गोंड की नियुक्ति से इलाके के किसानों व मिल कर्मचारियों में एक बार खुशी की लहर इसलिए दौड़ गई गई थी की अब चीनी मिल बेलरायां से संकट के बादल जरूर हट जाएंगे लेकिन ये किसी को नहीं मालूम था कि चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार के तिलस्म को भेदना शायद प्रशासनिक अधिकारी एडीएम रैंक के जीएम शुशील कुमार गोंड के लिए मुश्किल होगा।
मिल के पूर्व संचालक वीरेंद्र वर्मा ने चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह के काले कारनामों व भृष्टाचार की लिखित शिकायती पत्र जीएम शुशील कुमार गौंड को लिखित पत्र में डुप्लीकेट राड, ठेकेदारों से भारी कमीशन के चलते रिपेयरिंग का काम सही ढंग से न होना इसलिए पेराई सत्र में मिल का बार-2 बन्द होना अपने चहेते ठेकेदारों से एलवन में रेट न आने के बाद भी उनसे काम कराना दिया था लेकिन अफसोस इस बात का की पीसीएस जीएम शुशील कुमार गोंड सहित,चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार व मुख्य लेखाधिकारी रवि चौधरी सहित समस्त जुम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल खडे हो रहे है क्योंकि इन जुम्मेदार अधिकारियों की निगरानी मे चीनी मिल बर्बादी की कगार पर पहुंचते हुए आज हजारों करोड़ के घाटे में पहुंच गई।किसानों का मांग है कि पिछले 2019-20 सत्र व इस सत्र में होने वाले कार्यों की जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से हो तो सच्चाई सामने आए।

रिपोर्ट – अजय वर्मा

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