विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को दक्षिण-पूर्व एशिया और विश्व के अन्य हिस्सों में पात्र लोगों से नियमित, स्वैच्छिक और निश्शुल्क रक्तदान करने की अपील की। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा कहा गया कि रक्तदान से लोगों की जिंदगी बचाने में सहायता मिलेगी और स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा।
डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डा पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि हर साल अनुमानत: 11.85 करोड़ लोग रक्तदान करते हैं। इनमें लगभग 40 प्रतिशत रक्तदान ऊंची आमदनी वाले देशों में किए जाते हैं, जहां दुनिया की सिर्फ 16 प्रतिशत आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि कम आमदनी वाले देशों में आम तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। यदि नियमित रूप से स्वैच्छिक और निश्शुल्क रक्तदान किया जाए, तो गर्भवती महिलाओं और बच्चों की मौत से लड़ने में मदद मिलेगी।
हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा सकता है ताकि ट्रांसफ्यूजन के लिए सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। यह दिन उन लोगों के योगदान का भी सम्मान करता है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में खुद से और बिना पैसे लिए ब्लड डोनेट करते हैं।
रक्त और रक्त से जुड़े प्रोडक्ट्स कई लोगों की जान बचाने का काम करते हैं, जैसे- गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित रक्तस्राव से पीड़ित महिलाएं, मलेरिया और कुपोषण के कारण एनीमिया से पीड़ित बच्चे, ट्रामा, आपात स्थिति, आपदाओं और दुर्घटनाओं के शिकार, और रक्त और बोन मैरो विकार से पीड़ित लोग, हीमोग्लोबिन के वंशानुगत विकार और प्रतिरक्षा-कमी की स्थिति।
खून की ज़रूरत दुनियाभर में है और कई निम्न और मध्यम आय वाले देश आजकल रक्त की कमी का सामना कर रहे हैं। विश्व रक्त दाता दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी (WHO) की एक पहल है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय रक्त आधान सेवाओं, और रक्त दाता संगठनों को राष्ट्रीय और स्थानीय अभियानों को मज़बूत करके स्वैच्छिक रक्त दाता कार्यक्रमों को मजबूत और विस्तारित करने में सहायता मिलती है।









