तालिबान के कब्जे के बाद अब अफगानिस्तान के हालात बदल गए हैं। पूरे देश में हर ओर अराजकता का माहौल है। अशरफ गनी के देश छोड़कर भागने के बाद तालिबान ने सरकार की हर चीज पर कब्जा जमा लिया है। इसमें अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान को दिए गए अत्याधुनिक हथियार, प्लेन, लड़ाकू हेलीकॉप्टर, ड्रोन, और ना जाने कई अत्याधुनिक गाड़ियां शामिल हैं। लगभग एक महीने पहले, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा काबुल को दिए गए सात नए हेलीकॉप्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थीं।
कुछ ही हफ़्तों में तालिबान ने देश के अधिकांश हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था, साथ ही साथ अफ़ग़ान सेना द्वारा छोड़े गए हथियारों और उपकरणों को भी जब्त कर लिया है। सामने आई कुछ तस्वीरों और वीडियो में तालिबानी उन हथियारों और सैन्य गाड़ियों के साथ नजर आ रहे हैं जो अमेरिकी सैनिक इस्तेमाल करते थे या जो अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों को दिए गए थे। तालिबान के हाथ लगे अमेरिकी सैन्य साजो सामान के चले आतंकी संगठन को पहले से ज्यादा घातक हो गया है।
तालिबान के इस हथियारों के जखीरे में अमेरिका निर्मित आमर्ड वीकल हंबी, विमान, लड़ाकू हेलीकॉप्टर, नाइट विजन गॉगल्स और ड्रोन विमान शामिल हैं। सामने आए वीडियो में तालिबानियों को वाहनों की लंबी लाइनों का निरीक्षण करते हुए और नए आग्नेयास्त्रों, संचार उपकरण और यहां तक कि सैन्य ड्रोन को खोलते हुए देखा जा सकता है। इनमें कंधार एयरपोर्ट पर मौजूद अत्याधुनिक यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और अन्य उपकरण भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि यूएस हमवी समेत 2000 सैन्य वाहन तालिबान के हाथ लगे हैं। तालिबान को हजारों की तादाद में घातक राइफलें और लेजर गाइडेड बम मिले हैं। कई घातक यूएच-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर समेत 40 विमान उनके कब्जे में हैं, जिनमें स्काउट अटैक हेलिकॉप्टर और स्कैन ईगल मिलिट्री ड्रोन भी है। इन हथियारों के चीन और रूस के हाथ में पड़ने के डर से अमेरिका घबरा गया है और वह जखीरे पर बम बरसाने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन हथियारों को लेकर इतना चिंतित है कि वह कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।
पूर्व अमेरिकी अधिकारियों को अब यह चिंता है कि तालिबान के कब्जे में आए घातक हथियार आम नागरिकों की हत्या में काम आ सकते हैं। यहां तक कि वे आईएसआईएस जैसे दूसरे आतंकी संगठनों तक पहुंच सकते हैं, जो क्षेत्र में अन्य जगह अमेरिका के ही खिलाफ उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामले समिति के सदस्य व शीर्ष रिपब्लिकन सांसद माइकल मैक्कॉल का कहना है कि हम तालिबान लड़ाकों के हाथ में पहले ही अमेरिका निर्मित हथियार देख रहे हैं, जो उन्होंने अफगान सेना से छीने हैं। यह अमेरिका और हमारे सहयोगियों के लिए बड़ा खतरा है।
अमेरिका ने 2002 से 2017 के बीच अफगान सेना को 28 अरब डॉलर के हथियार दिए हैं, जिनमें बंदूक, रॉकेट, नाइट विजन गॉगल्स और खुफिया जानकारी जुटाने वाले छोटे ड्रोन शामिल हैं। 2003 से 2016 के बीच अफगान सेना को 208 विमान व हेलीकॉप्टर दिए गए। इनमें से 40 से 50 विमान अफगान पायलट तालिबान हमले के दौरान उज्बेकिस्तान लेकर भागने में सफल रहे। एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने सबसे ज्यादा चिंता तालिबान के हाथ लगे नाइट-विजन गॉगल्स और कम्युनिकेशंस उपकरण हैं।
अमेरिका की तरफ से अफगान बलों को दिए गए 6 लाख इंफेंट्री हथियार, जिनमें घातक एम16 असॉल्ट राइफल और 162,000 संचार उपकरण भी शामिल है, अब तालिबान के कब्जे में हैं। अमेरिका ने अफगान सेना को 2003 से 16000 नाइट-विजन गॉगल्स उपकरण दिए थे। अब इनमें से अधिकतर तालिबान के कब्जे में हैं। जो रात को लड़ने की क्षमता असली गेमचेंजर साबित हो सकती है।
अफगानिस्तान में सैन्य अभियान की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड के 2016 से 2019 तक प्रमुख रहे रिटायर्ड जनरल जोसेफ वोटल तालिबान के हाथ लगी मशीन गनों, मोर्टारों और कई हॉवित्जर तोप को वहां के गृह युद्ध में बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि इस असलहे की बदौलत तालिबान अब तक अपने कब्जे में नहीं आने वाली पंजशीर घाटी में विरोधी गुटों पर एक बढ़त हासिल कर सकता है।









