नई दिल्ली: 10 फरवरी 2022को पश्चिमी यूपी के जाटलैंट में, जिसे हरित प्रदेश भी कहा जाता है, वोटिंग के समय जो
जो अफरा-तफरी और झड़पों का माहौल रहा, उससे साफ साफ जाहिर होता है कि जीतने के लिए एक विशेष दल कुछ भी करने पर आमादा है। कई जगह ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें और बूथ कैपचरिंग करने जैसी कोशिशों के बीच मतदाताओं में गुस्सा दिखा। कई जगह नारेवाजी भी लगाई गई हालांकि माहौल और वोटिंग की हवा अभी अनसुलझे से सवाल सामने खड़ी हो गई है, जिस पर सस्पेंस रखना जरूरी भी है।
हालांकि माहौल अधिकतर जगह बीजेपी के खिलाफ ही दिखाई दिया। कहने की जरूरत नहीं है कि जाटलैड में जाटों के साथ सिर्फ वादों से खेला गया है, उसके बाद किसानों की नाराजगी कृषि कानूनों के चलते 2020 में शुरू हुए आंदोलन से बढ़ी, जिसे तीनों कृषि कानून वापस लेकर मोदी सरकार ने शांत करने की भरपूर कोशिश तो की, लेकिन 50 दिन में किसानों की बाकी मांगें पूरी करने का वादा न मोदी सरकार ने निभाया और न ही योगी सरकार के जिम्मे वादे ही निभाये गये। ऊपर से किसानों पर वाहन चढ़ाकर पांच लोगों को दिन दहाड़े मौत के घाट उतारने वाले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा उर्फ टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की पहले चरण की वोटिंग के समय ही हुई जमानत पर लोगों में गुस्सा और फूटा, जो अब शायद ही शांत हो, खासतौर पर किसानों में तो नहीं होगा।
इधर 10 फरवरी को सुबह वोटिंग शुरू होने के समय ही मुरादाबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राकेश टिकैत ने लोगों से अपील कर डाली कि वो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ वोटिंग करें। राकेश टिकैत ने कहा कि फसल और नस्ल बचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) को हराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने किसानों का सिर्फ और सिर्फ शोषण किया है. इस चुनाव में उन्हें दंड जरूर मिलना चाहिए।
सरकार जिस भाषा को समझती है, हम उसी भाषा में सरकारों को समझाएंगे। प्रदेश में एमएसपी पर खरीद नहीं हो रही है। बीजेपी सरकार बिजली के नाम पर किसानों को बहका रही है। संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से जारी अपील में टिकैत ने किसानों को आंदोलन की त्रासदी और किसानों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, बाटर कैनन से हमले, झूठे मुकदमे दर्ज करने और किसानों को गद्दार, दलाल,परजीवी, आंदोलन-जीवी खालिस्तानी व आतंकवादी कहने की बात याद दिलाई। राकेश टिकैत किसान आंदोलन का बड़ा चेहरा उभर कर सामने आया है और यूपी ही नहीं पूरे देश की किसानों की अगुवाई उन्होंने आंदोलन के दौरान की है।
ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उनकी अपील का बड़ा असर लोगों पर पड़ेगा और इससे भारतीय जनता पार्टी को(बीजेपी) काफी नुकसान होने की संभावना रहेगी। क्योंकि खीरी लखीमपुर में किसान रैली में जानबूझकर दिन दहाड़े की गई हत्याओं की बात किसान नहीं भूले। जिसमें खुद जांच एजेंसियों ने भी साफ तौर पर माना है कि केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा उर्फ टेनी का बेटा आशीष मिश्रा दोषी है, और उसके बाद ही आशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद पत्रकारों के सवालों पर खुद अजय कुमार मिश्रा ने पत्रकारों से बदसलूकी भी की थी। लेकिन अब उसी दोषी आशीष मिश्रा को जमानत मिल गई है। ऐसे में इसका भी बीजेपी के खिलाफ एक नकारात्मकता लोगों में फैली है, जिसका नतीजतन किसान परिवारों में तो गुस्सा दिखाई दिया है।
वैसे तो कई मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर एक बड़ा तबका बीजेपी की योगी सरकार से खास नाराज है, लेकिन बीजेपी ने उसे हर तरह से शांत करने की कोशिश की है और पहले चरण की वोटिंग से पहले मेनिफैस्टो भी जारी किया था। लेकिन इसका लोगों पर क्या और कितना असर होगा, इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अगर पहले चरण की बात करें, तो इस चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर होने वाले चुनाव में कुल 2.28 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब 1.24 करोड़ पुरुष और करीब 1.04 करोड़ महिला वोटर हैं।
बाकी के करीब 1448 ट्रांसजेंडर वोटर इस इलाके में रहते हैं। यूपी के इस हरित क्षेत्र की इन 58 सीट पर करीब शाम छह बजे तक वोटिंग हुई। इस पहले चरण में कुल 623 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है। पहले चरण में 898 मोहल्ले और 5535 पोलिंग सेंटर संवेदनशील रखे गए थे। वोटिंग की गति धीमी होने के चलते इस चरण की वोटिंग को एक घंटा बढ़ाना पड़ा। शाम 6 बजे तक चले इस पहले चरण के चुनाव में औसत वोटिंग करीब 60 फीसदी से अधिक हुई।
सबसे ज्यादा वोटिंग मुजफ्फरनगर में और कैराना में हुई। निर्वाचन आयोग के मुताबिक आगरा में शाम 5 बजे तक 56.61 फीसदी, अलीगढ़ में 57.25 फीसदी, बागपत में 61.35 फीसदी, बुलंदशहर में 60.52 फीसदी, गौतम बुद्ध नगर में 54.77 फीसदी, गाजियाबाद में 54.77 फीसदी, हापुड़ में 60.50 फीसदी, मथुरा में 58.51 फीसदी, मेरठ में 58.52 फीसदी, मुजफ्फरनगर में 62.14 फीसदी और शामली में 61.78 फीसदी वोटिंग हुई।
इस मतदान की दिलचस्प बातें ये रहीं कि रालोद के चीफ जयंत चौधरी मतदान से चूक गए। और दुखद पहलू यह रहा कि बीजेपी के एक प्रत्याशी ने एक वोटर की यह कहते हुए पिटाई कर डाली कि वह फर्जी वोटिंग कर रहा था। दरअसल बीजेपी नेताओं की दबंगई और दूसरों पर बहुत जल्दी हाथ छोड़ने वाली आदत बन चुकी है। यूपी में ऐसे बीजेपी नेताओं की एक लंबी फेहरिश्त है, जो लोगों को धमकाने और उन्हें पीटने तक पर आमादा हो चुके हैं।
रिपोर्ट : चौधरी अफज़ल नदीम









