पाकिस्तान के होने वाले नए पीएम शहबाज का भारत से क्या है नाता

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पाकिस्तान में इमरान खान सरकार की रवानगी हो चुकी है. अब वहां नया प्रधानमंत्री बनना है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के हाथ मिलाने के बाद गठजोड़ सरकार का बनना तय है. ये भी पक्का है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ देश के नए पीएम बनेंगे. भारत के एक छोटे से गांव में उनके पीएम बनने के लिए प्रार्थनाएं हो रही हैं. सुनने में ये अजीब लगता है कि भला भारत में पाकिस्तान के किसी नेता के लिए ऐसा क्यों हो सकता है, वजह है कि ये गांव शरीफ फैमिली का पैतृक गांव है।

ये सीमावर्ती गांव अमृतसर में है. इसका नाम है जाटी उमरा. ये छोटा सा लेकिन समृद्ध गांव है. रविवार को यानि 10 अप्रैल को यहां के गुरुद्वारे स्थानीय लोग शहबाज के प्रधानमंत्री बनने की प्रार्थना के लिए इकट्ठा हुए. दरअसल ये उनके गांव के लिए फख्र की बात होगी अगर उनकी मिट्टी से जुड़ा कोई शख्स इतने ऊंचे पद पर पहुंचे और इतनी तरक्की कर ले।

शरीफ परिवार आजादी के बाद बंटवारे में यहां से पाकिस्तान चला गया था लेकिन वो आज भी इस गांव के संपर्क में रहते हैं. तब अविभाजित भारत में पंजाब के इस गांव में ये हिंदू बहुल गांव था. यहां अकेला घर एक मुस्लिम का था. बंटवारे के समय इस परिवार ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया. दरअसल शरीफ का परिवार मूल तौर पर कश्मीरी है।
उनके पिता अनंतनाग से पंजाब से इस गांव में आए. शहबाज की मां पुलवामा से ताल्लुक रखती हैं. बंटवार के बाद उनके पिता ने लाहौर में बिजनेस शुरू किया और ये समय के साथ बड़ा होता गया. इस समय शरीफ का इत्तेफाक ग्रुप पाकिस्तान के बडे़ उद्योग समूहों में एक है।

शरीफ परिवार हमेशा इस गांव को याद करता रहा है. 1964 में शहबाज अपने पिता के साथ पहली बार यहां आए. हालांकि उनके पिता मियां मुहम्मद शरीफ 1979 में यहां आए. शहबाज ने 15 दिसंबर 2013 में फिर यहां का दौरा किया. हालांकि शहबाज और उनके बडे़ भाई नवाज इस गांव में पैदा नहीं हुए. वो दोनों लाहौर में आजादी के बाद पैदा हुए. लेकिन शरीफ परिवार ने हमेशा इस गांव से अपने नाते को जोड़े रखा. ये गांव अमृतसर से 35 किलोमीटर दूर है. गांव का सड़क संपर्क अच्छा है और यहां दूसरी सुविधाएं भी हैं।

गांव के लोगों में फख्र का अहसास
इमरान खान सरकार के गद्दी से उतरने के बाद जब ये साफ हो गया कि अब शहबाज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन सकते हैं तब इस गांव में माहौल ही बदल गया. यहां के लोगों को फख्र महसूस हो रहा है. गांव में अब भी कई ऐसे लोग रहते हैं जिन्हें याद है कि शरीफ के पिता यहां कैसे रहते थे, किन परिवारों के साथ उनके गहरे ताल्लुकात थे. यहां कई लोग ऐसे हैं, जो शरीफ परिवार के बुलावे पर लाहौर गए और वहां उनकी खूब खातिरदारी हुई।

शहबाज 03 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं
बंटवारे से पहले पाकिस्तान में जाने के बाद शरीफ परिवार ने गांव के कई लोगों की नौकरियां भी खाड़ी के देशों में लगवाईं. वैसे शहबाज की इमेज कट्टरपंथी नेता की रही है. वह फिलहाल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के प्रमुख हैं. वर्ष 2018 से देश की नेशनल असेंबली के मेंबर हैं. इससे पहले वो 03 बार पाकिस्तानी सूबे पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

तब देश से बाहर सऊदी अरब में निर्वासन में रहने लगे थे
1999 में देश में सैन्य तख्तापलट के बाद शहबाज अपने परिवार के साथ सऊदी अरब स्वनिर्वासन में चले गए थे. इसके बाद वर्ष 2007 में वह वापस लौटे. तब पंजाब विधानसभा में जीत के बाद वो वहां मुख्यमंत्री बने. वर्ष 2013 में तीसरी बार सीएम बने. वो पंजाब में लंबे समय तक सीएम रहने वाले पालिटिशियन भी हैं।

मनी लांड्रिंग के आरोपों में फिलहाल जमानत पर
जब उनके बड़े भाई और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को डिस्क्वालिफाई कर दिया गया तब शहबाज ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की कमान संभाली. दिसंबर 2019 में उनसे जुड़ी 23 संपत्तियों को नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो ने फ्रीज कर दिया था. तब उनके पुत्र हम्जा शरीफ पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगा था. इसके बाद 28 सितंबर 2020 को उन्हें भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया. अभी इस मामले में उन पर ट्रायल पेंडिंग है. पिछले साल अप्रैल में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था।

शहबाज ने दो शादियां कीं. पहली शादी उन्होंने कजन नुसरत से 1973 में की. इससे उन्हें दो बेटे और दो जुड़वां बेटियां हैं. इसके बाद एक जमाने में पाकिस्तान में चर्चित रहीं तहमिना दुर्रानी के साथ 2003 में दूसरी शादी रचाई. तहमिना उनके लाहौर के पैतृक आवास रायविंद पैलेस में रहती हैं. तहमिना से शादी को लेकर उनके परिवार में काफी तनाव और विवाद भी हुआ. वैसे शहबाज अपने भाई से ज्यादा अमीर हैं.

72 साल के हैं
72 साल के शहबाज का जन्म लाहौर में 23 सितंबर 1951 को हुआ था. उन्होंने लाहौर से ही ग्रेजुएशन किया. फिर वो अपने परिवारिक बिजनेस से जुड़ गए. बड़े भाई नवाज के राजनीति में आने के बाद उन्होंने सियासत में कदम रखा. हालांकि शरीफ परिवार में नवाज, शहबाज के अलावा तीसरे भाई अब्बास भी थे. वह भी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के मेंबर रहे लेकिन वर्ष 2013 में कार्डिक अरेस्ट से उनका निधन हो गया।

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