बीजेपी के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी का लंबी बीमारी के कारण निधन ,पीएम मोदी समेत कई नेताओ ने जताया दुःख

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उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर के पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शरद त्रिपाठी का लंबी बीमारी के कारण बुधवार को निधन हो गया। शरद त्रिपाठी महज 49 वर्ष के थे। शरद त्रिपाठी साल 2014 का लोकसभा चुनाव जीतक संतकबीरनगर संसदीय क्षेत्र से सांसद बने थे। बीजेपी के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी के असयम निधन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ तक दुखी हैं। इन नेताओं ने ट्वीट के माध्यम से शरद त्रिपाठी के निधन पर शोक जताया है। शरद त्रिपाठी के पिता रमापति राम त्रिपाठी फिलहाल देवरिया से सांसद हैं और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक शरद त्रिपाठी पिछले काफी वक्त से बीमार चल रहे थे। गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में 30 जून की रात उन्होंने आखिरी सांस ली। लीवर संबंधी बीमारी की वजह से त्रिपाठी की 49 साल की उम्र में मौत हुई है। काफी लंबे वक्त से शरद त्रिपाठी बीमार चल रहे थे। उनके करीबी रिश्तेदार और आरएसएस कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने कहा कि उनकी पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे हैं। शरद त्रिपाठी का पार्थिव शरीर गुरुवार (1 जुलाई) शाम हवाई मार्ग से गोरखपुर पहुंचेगा। उनके परिवार के सदस्यों ने कहा है कि शुक्रवार (02 जुलाई) को अयोध्या में अंतिम संस्कार समारोह हो सकता है।

भाजपा के पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी गोरखपुर के मूल निवासी थे। उनका पैतृक गांव खजनी तहसील क्षेत्र में पड़ता है। गोरखपुर के धर्मशाला इलाके में शरद त्रिपाठी अपने परिवार के साथ रहते थे। सांसद शरद त्रिपाठी का जन्म 9 जनवरी 1972 को हुआ था। उन्होंने अपने पोस्ट-ग्रेजुएश की पढ़ाई कानपुर यूनिवर्सिटी से की है। शरद त्रिपाठी 2014 में संतकबीरनगर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी देवरिया से भाजपा सांसद हैं। रमापति राम त्रिपाठी यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। शरद त्रिपाठी, यूपी बीजेपी के सक्रिय नेता थे।

शरद त्रिपाठी, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले चर्चा में आए थे, जब उन्होंने मेंहदावल के बीजेपी विधायक राकेश सिंह को एक बैठक के दौरान जूता दिखाया था और मारने की धमकी दी थी। कलेक्ट्रेट सभागार शरद त्रिपाठी और विधायक के बीच मारपीट हो गई थी। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस घटना के बाद ही शरद त्रिपाठी को संतकबीरनगर से टिकट मिला था। लेकिन पार्टी ने उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से टिकट दिया था।

संतकबीरनगर से टिकट नहीं मिलने पर शरद त्रिपाठी ने कहा था, ”देखिए जब स्वहित की बात आती है तो फायदे और नुकसान की चिंता होती है। जब राष्ट्रहित की बात होती है, तो फायदा और नुकसान नहीं देखा जाता है। अगर इस देश के लाखों राजपूतों ने लोकतंत्र के लिए अपनी जान दी थी तो हम तो अपने सिर्फ एक सांसदीय क्षेत्र की शहादत दे रहे हैं…इसलिए हमें जरा सी भी चिंता नहीं है।” शरद त्रिपाठी ने टिकट ना मिलने पर कभी भी बीजेपी की आलोचना नहीं की। उन्होंने हमेशा यही कहा कि उन्हें टिकट नहीं मिलने का कोई दुख नहीं है। शरद त्रिपाठी के निधन के बाद उनका ये वीडियो वायरल हो रहा है।

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