बीजेपी को यूपी में घेरने का प्लान तैयार,भारतीय किसान यूनियन ने 5 सितंबर को बुलाई महापंचायत

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उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसानों पर होने वाली सियासत और गरमाने वाली है। एक तरफ जहां योगी सरकार और बीजेपी दोनों मिलकर किसानों को खुश करने और समझाने में जुटी हुई है वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने बीजेपी को घेरने का प्लान तैयार कर लिया हैं। यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर के सिशौली में किसान महापंचायत बुलाई है जिसमे हजारों किसानों के आने का दावा किया जा रहा है।

मोदी सरकार ने संसद में नए कृषि कानूनों को मंजूरी दी थी। भारतीय किसान यूनियन के अलावा कई सारे संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इसी विरोध लो दबाने के लिए और किसानों को खुश करने के लिए योगी सरकार ने कई घोसनाएं की थीं। दरअसल BKU ने सिसौल में जो महापंचायत बुलाई है उसका कुछ खाप पंचायतों की ओर से विरोध किया जा रहा है। कुछ दिनों पहले ही सिसौली में बीजेपी विधायक उमेश मालिक का जबरदस्त विरोध हुआ था। इस विरोध के बाद उमेश मालिक के समर्थकों ने BKU का विरोध शुरू कर दिया था। अब मालिक के समर्थकों का कहना है कि इनका उमेश मालिक जात नहीं थे। उनके ऊपर हमला क्यों किया गया।

इधर, राकेश टिकैत सिसौल की महापंचायत को सफल बनाने में जी जान से जुटे हुए हैं। अब वो उमेश मालिक को जात अस्मिता से जोड़कर एकजुट करना चाहते हैं। उनका कहना है कि पहले आप लोग सिसैली के पंचायत को सफल बनाने में मदद करो फिर उमेश मालिक वाले मामले को भी सुलझा लिया जाएगा

मुजफ्फरनगर के सिसौलि में होने वाली महापंचायत को सफल बनाने के लिए आरएलडी और सपा लगी हुई है। सूत्रों के अनुसार 5 सितंबर को होने वाली महापंचायत में आरएलडी और सपा के कार्यकर्ता भी पहुचेंग। दरअसल इन दोनो पार्टियों का मकसद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ माहौल बना है। आरएलडी के नेताओं को भी लगता है कि इस पंचायत को सफल बनाकर ये संदेश दिया जा सकता है कि किसान भाजपा सरकार के खिलाफ है।

योगी ने तीन दिन पहले ही किसान संवाद कार्यक्रम में यह ऐलान किया था कि गन्ने के अगले पेराई सत्र से SAP की दरों में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही सरकार ने उन किसानों के ऊपर लगे मुकदमों को वापस लेने का फैसला लिया है जो पराली जलाने को लेकर लगाए गए थे। सरकार के इन फैसलों को लेकर बीजेपी ने किसानों के बीच जाने का प्लान तैयार किया है।

लखनऊ के पांच कालीदास मार्ग पर किसानों के साथ संवाद के दो दिन के भीतर ही सरकार ने उन जिलों कि सूची जारी कर दी है, जहां के किसानों पर पराली जलाने को लेकर दर्ज किए गए की वापस लिए जाएंगे। इनमें लखीमपुर खीरी के 165, महाराजगंज के 129, पीलीभीत के 108, रामपुर के 45, रायबरेली बे 43, झांसी के 30 और औरैया के 25 किसान शामिल है। हालाकि सरकार के सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में और भी किसानो को इस तरह की राहत मिल सकती है।

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