बेलरायां खीरी: जांच के अभाव में घाटे से जूझती मिल अधिकारियों की संपत्ति की जांच हो

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बेलरायां खीरी: कहने को सहकारी संस्थाओं में किसानों की भागीदारी है उनके शेयर होल्डर होने की स्थिति में संस्था पर मालिकाना हक रखने वाले किसान आज अपनी संस्था को कर्जे में डूबते देखकर खून के आँसू रोने को मजबूर हैं,जिसका मुख्य कारण है खून पसीनें से सींची गई उनकी संस्था भृष्टाचार के कारण आज हजारों करोड़ के घाटे में पहुंचकर बन्द होने की कगार पर पहुंच चुकी है,प्रशासन से भृष्टाचार की जांच की मांग करते-2 आज किसान मिल बचाओ हस्ताक्षर अभियान चलाने की बात करने लगा है,इसके बाद भी प्रशासन ने भृष्टाचार की जांच करने के लिए कोई ठोस रणनीति नही बनाई तो किसानों में आक्रोश ब्याप्त होना लाजिम था। किसानों का मानना है कि अगर प्रशासन मिल में फैले भृष्टाचार की जांच नही करवाता है,तो किसान माननीय न्यायालय की शरण लेते हुए जनहित याचिका के माध्यम से अपने संस्थान को बचाने का प्रयास करेंगे।

स्थानीय कस्बा बेलरायां की लाइफ लाइन कही जाने वाली सरजू सहकारी चीनी मिल कभी नेशनल एवार्ड से नवाजी जा चुकी थी लेकिन आज अपने अस्तित्व को मिटता हुआ देख खून के आंसू रोने पर मजबूर है। मिल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 17 करोड़ की लागत से बनी चीनी मिल बेलरायां छमता विस्तारीकरण के बाद इसमें भृष्टाचार का ऐसा दीमक लगा कि धीरे-2 हजारों करोड़ के घाटे में पहुंचकर अपने वजूद को बचाने की जद्दोजहद में लग गई।

मिल की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किसानों का बोर्ड बना लेकिन किसानों का बोर्ड भी मिल अधिकारियों व चीनी मिल संघ की नीतियों के आगे नतमस्तक होकर मिल को घाटे से उबारने में कामयाब न हो सका और भृष्टाचार का दीमक मिल की जड़ो को धीरे-2 कमजोर करता चला गया।सूबे की भाजपा सरकार ने सहकारी चीनी मिलों को उनकी आर्थिक स्थिति से उबारने के लिए पीसीएस जीएम की तैनाती की लेकिन वर्षों से मिल में जमें विभागीय अधिकारियों के भृष्टाचार के तिलस्म को तोड़ पाना पीसीएस जीएम के लिए भी मुमकिन न हो पाया जिससे मिल हजारों करोड़ के घाटे में पहुंचते हुए मिल पर आर्थिक संकट के बादल गहराने लगे,जिससे आहत किसान डॉ संजय वर्मा,राकेश वर्मा,देवेंद्र वर्मा,जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी वर्मा,अवध बिहारी लाल,कंचन वर्मा,जसवंत वर्मा,अजय वर्मा,धनीराम वर्मा सहित सैकड़ों किसानों ने मुख्य गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश सरकार व प्रबन्ध निदेशक चीनी मिल संघ लखनऊ को पत्र के माध्यम से चीनी मिल में मेंटिनेंस ठेकेदारों से कराए जाने वाले कार्यों पर मिल से दिए जाने वाले भुगतान व सप्लायरों से सामान की खरीद पर मिल से किए जाने वाले भुगतान के बिलों व खरीदे गए सामान व कार्यों की जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराया जाय और मिल में अब तक चीनी,शीरा, बैगास,प्रसमड कितनी बनी और कितनी बिक्री हुई कितना स्टॉक है इसका शोशल आडिट कराया जाय।

जबकि इससे पूर्व में मिल के पूर्व संचालक वीरेंद्र कुमार वर्मा ने प्रबन्ध निदेशक चीनी मिल संघ व मिल के जीएम को लिखित प्रार्थना पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए बताया था कि मिल के मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार द्वारा मेंटिनेंस ठेकेदारों व सप्लायरों से 10 प्रतिशत कमीशन की मांग करते हैं कमीशन न देने पर मिल में कार्य न करने की धमकी देते है और अपने चहेते ठेकेदारों के एलवन न आने के बावजूद उन्ही से काम करवाते हैं।और अपने चहेते ठेकेदारों के नाम से फर्जी आर्डर बनवाकर उनका भुगतान करा लेते हैं।स्क्रेप बिक्री में ठेकेदार से मिलकर मुख्य अभियंता वीरेन्द्र कुमार ने तांबा,कापर बेच दिया जिससे मिल को लाखों का नुकसान हुआ,मिल अधिकारियों की संपत्ति की जांच हो पूर्व संचालक व किसान वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने बताया कि जांच न होने के ही कारण आज दोषी मिल अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं और मिल हजारों करोड़ के घाटे में पहुंच गईं,साथ ही समाचार पत्रों में किसानों की आवाज को उठाने पर मिल अधिकारियों द्वारा तथा उनके शुभचिंतकों द्वारा पत्रकारों को धमकी देना बहुत ही निंदनीय है,इसकी हम सब किसान निंदा करते हैं।

रिपोर्ट- अजय वर्मा

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