मायके से शुरू की थी राजनीति, रोचक है राजस्थान की पहली महिला CM की कहानी

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राजस्थान में जनसंघ और बीजेपी के सबसे बड़े नेता भैरोसिंह शेखावत हुआ करते थे. 2002 में जब वो उपराष्ट्रपति बने तो बीजेपी (BJP) के कई नेताओं के लिए राजस्थान में आगे बढ़ने का मौका बना. दिल्ली में वाजपेयी ने राजस्थान के पार्टी अध्यक्ष के बारे में भैरोंसिंह शेखावत  से पूछा. कुछ नामों पर चर्चा हुई. फिर शेखावत ने एक नाम लिया तो अटलजी चौंक गए. यह नाम अटल सरकार में मंत्री और धौलपुर की रानी रहीं वसुंधरा राजे का था.

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे का आज जन्मदिन है. वो 69 साल की हो गई हैं. आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस भी है. आइये, इस मौके पर जानते हैं राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री राजे की दिलचस्प कहानी.

वसुंधरा राजे की भले ही राजस्थान में राजनीतिक यात्रा लंबी रही हो, लेकिन उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत उनके मायके से ही हुई. वसुंधरा ग्वालियर के राजघराने से संबंध रखती हैं. 8 मार्च, 1956 को मुंबई में जन्मी राजे की 1972 में धौलपुर के राजघराने में हेमंत सिंह से शादी हुई. लेकिन शादी के एक साल बाद ही दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया. बेटे दुष्यंशत के जन्म के बाद ही वसुंधरा अपने पति से अलग हो गई और अपने मायके ग्वालियर में रहने लगीं. वसुंधरा की मां विजया राजे बीजेपी से जुड़ी हुई थीं. वसुंधरा ने भी अपनी मां की तरह बीजेपी पार्टी से हाथ मिलाने का फैसला किया.वसुंधरा राजे ने 1984 में राजनीति में कदम रखा. उन्होंने भिंड से अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें अपने पहले ही चुनाव में हार मिली. राजस्थान के कद्दावर नेता भैरोसिंह शेखावत की सलाह पर उन्होंने 1985 में ना सिर्फ धौलपुर से चुनाव लड़ा, बल्कि जीता भी. इस जीत के कुछ समय बाद वे राजस्थान बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष बनीं. इसके बाद से ही वसुंधरा राजे ने राजस्थान की सियासी राजनीति में मजबूती से पैर जमाना शुरू कर दिया.

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