मुस्लिम कर्मचारी वाले विवाद पर लुलु मॉल की सफाई, कहा- हमारे 80 फीसदी स्टाफ हैं हिंदू

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले दिनों खुले लुलु मॉल परिसर के अंदर नमाज पढ़ने के मामले को लेकर विवाद के बीच मॉल प्रशासन ने सफाई दी है. केवल मुस्लिमों को ही नौकरी देने के आरोप पर सफाई देते हुए लुलु मॉल प्रशासन ने एक बयान में कहा है कि उसके 80 प्रतिशत कर्मचारी हिंदू हैं. मॉल प्रशासन की ओर से यह स्पष्टीकरण उन आरोपों के बाद आया है, जिसमें कहा गया कि मॉल अपनी रोजगार नीति में पक्षपाती है और मुसलमानों को तरजीह देता है. लुलु मॉल के क्षेत्रीय निदेशक जयकुमार गंगाधर ने बयान जारी कर कहा कि प्रतिष्ठान में किसी को भी धार्मिक गतिविधि संचालित करने की छूट नहीं है।

लुलु मॉल लखनऊ प्रशासन ने मुस्लिम पूर्वाग्रह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से प्रोफेशनल प्रतिष्ठान है, जो बिना किसी भेदभाव के व्यापार करता है. बयान में कहा गया कि हमारे कर्मचारियों को कौशल और योग्यता के आधार पर काम पर रखा जाता है, न कि जाति, वर्ग या धर्म के आधार पर. बता दें कि मॉल की मूल कंपनी लुलु ग्रुप इंटरनेशनल का मुख्यालय अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात में है।

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) गोपाल कृष्ण चौधरी बताया था कि तहरीर के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर किया गया कार्य) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. मॉल प्रशासन ने शुक्रवार को पूरे परिसर में इस बात का नोटिस लगा दिया कि मॉल में किसी भी तरह के धार्मिक प्रार्थना की अनुमति नहीं होगी।

गौरतलब है कि कि लखनऊ के लुलु मॉल को यूपी का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल कहा जा रहा है. जब से इस मॉल की शुरुआत हुई, तब से ही यह लुलु मॉल चर्चा में है. बता दें कि अबू धाबी मुख्यालय स्थित लुलु समूह की एक शाखा लखनऊ के शहीद पथ पर शुरू की गई जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था. लुलु समूह का नेतृत्व भारतीय मूल के कारोबारी युसूफ अली एमए करते हैं।

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