मोदी और शाह के भरोसेमंद भूपेन्द्र यादव बनेंगे वसुंधरा का विकल्‍प?

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव गुरुवार को राजस्थान में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं. अलवर के भिवाड़ी से शुरू हुई उनकी यात्रा में जोश और उत्साह नजर आया है. वैसे तो केंद्र सरकार के नए बने 39 मंत्री ये यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन राजस्थान में भूपेंद्र यादव की यात्रा ने बीजेपी की अंदरुनी सियासत को भी गर्मा दिया है. उसकी वजह है राजस्थान बीजेपी में अगले विधानसभा चुनाव के लिए चल रही सीएम फेस की जंग. सीएम फेस को लेकर आपसी गुटबाजी में फंसी राजस्थान बीजेपी के सभी गुटों की नजर यादव की यात्रा को मिलने वाले समर्थन पर टिकी है. भूपेंद्र यादव को इस रेस में बड़ा फेस माना जा रहा है।

राजनीतिक विशलेषकों के अनुसार, इसकी दो वजहें हैं. भूपेंद्र यादव के रणनीतिक कौशल की वजह से ही 2013 में बीजेपी ने राजस्थान में रिकॉर्ड जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. मुख्यमंत्री का फेस तब भले ही वसुंधरा राजे थीं, लेकिन चुनाव की रणनीति और प्रबंधन की कमान यादव के पास थी. उसी चुनावी सफलता के बाद यादव बीजेपी के बड़े चुनावी रणनीतिकार बन कर उभरे. यादव ने अजमेर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिये छात्र राजनीति से सियासी सफर शुरू किया था. छात्र संगठन से राजनीति में आने की वजह से भूपेंद्र यादव की राजस्थान में सियासी पैठ काफी मजबूत है.

मोदी और शाह के भरोसेमंद है यादव
भूपेंद्र यादव गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजीदीकी और भरोसेमंद माने जाते हैं. यादव एक दफा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में भी शामिल थे. कई राज्यों में चुनावी रणनीतिकार के रूप में वे अपना लोहा मनवा चुके हैं. भूपेंद्र यादव की पर्दे के पीछे राजस्थान की सियासत में बड़ी भूमिका रही है और अभी भी है. यादव जातीय समीकरण के लिए लिहाज से भी इस रेस में बीजेपी का डार्क हॉर्स हैं. राजस्थान, हरियाणा, यूपी और दिल्ली में यादव काफी बड़ा वोट बैंक है. अगर राजस्थान में भूपेंद्र यादव को बीजेपी आगे करती है तो उसे यादव वोट बैंक को अपने पाले में करने का फायदा यूपी हरियाणा दिल्ली और एमपी में भी मिल सकता है।

राजस्थान में बीजेपी के पास राजे के मुकाबले मजबूत फेस नहीं
राजस्थान में 4 जातियों राजपूत, जाट, गुर्जर और मीणा समुदाय का चुनावी राजनीति में दबदबा है. खासकर जाट और राजपूत समुदाय के नेताओं के बीच बीजेपी में सीएम रेस की होड़ है. ऐसे में बीजेपी जरूरत पड़ने पर यादव का इस पद के लिए ट्रंप कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर सकती है. ​एक और वजह है यादव के सीएम फेस की रेस में बड़े दावेदार होने की. राजस्थान में वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रही हैं. अभी भी बतौर चेहेरे राजे के मुकाबले राजस्थान में बीजेपी के पास मजबूत फेस नहीं है।

भूपेंद्र यादव बन सकते हैं विकल्प
केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव राजे का विकल्प बन सकते हैं. वह कुशल रणनीतिकार भी हैं और बीजेपी संगठन का भी मजबूत चेहरा हैं. इस बात को वसुंधरा राजे का गुट भी बखूबी जानता है. यही वजह है कि यादव की इस यात्रा से राजे गुट ने दूरी बनाने के बजाय पोस्टरों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है. राजस्थान बीजेपी के सभी गुट के नेता ये जानते हैं कि भूपेंद्र यादव साल 2023 में सीएम फेस होंगे या नहीं, लेकिन उनकी बड़ी भूमिका तय मानी जा रही है. खासकर चुनावी रणनीति और टिकट बंटवारे में. राजस्थान बीजेपी की सियासत में कई पेंच हैं और दावेदारों की लिस्ट काफी लंबी है. हालांकि तस्वीर तो 2022 में ही कुछ साफ होगी लेकिन तब तक जोर आजमाइश का सिलसिला चलता रहेगा।

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