रायबरेली : तहसील प्रशासन के कार्यशैली को लेकर जहां पर आए दिन समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशन हो रही हैं लेकिन राजस्व कर्मियों के खाऊ कमाऊ नीति के कारण जिंदा को मुर्दा व जमीन का बैनामा पहले जमीन नाम आती है बाद में बैनामा की दाखिल खारिज पहले वरासत बाद में इस तरह के दर्जनों मामले प्रकाश में आए और उपजिलाधिकारी, तहसीलदार से लेकर जिले के आला अधिकारियों तक शिकायत की गई।
लेकिन इन तहसील के राजस्व कर्मियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो रही है बांनगी के तौर पर मामला ग्राम सभा नीम टीकर के निवासी विजयकांत पुत्र वासुदेव के पिता के मृत्यु के उपरांत गाटा नंबर 1164 जमीन पुत्र के नाम नही आए बगैर राजस्व अभिलेखों में जमीन आए की फर्जी खतौनी लगाकर बैनामा करा दिया गया बैनामा कर्ता ने दिनांक छब्बीस ग्यारह दो हजार अट्ठारह को रजिस्ट्रार कार्यालय में पिंकी पत्नी पंकज कुमार, रीना पत्नी रोहित कुमार द्विवेदी निवासी जयपुर राज बिहार जिला बहराइच के नाम बैनामा करा दिया गया।
वही जानकारी के अनुसार राजस्व अभिलेखों में नाम न दर्ज होने के उपरांत सब रजिस्टार ने बैनामा करवा दिया गया वहीं चर्चा आया है कि सब रजिस्टार द्वारा दो लाख से अधिक की रिश्वत लेकर बैनामा करवाया। जबकि नियमानुसार वरासत के उपरांत जमीन नाम आ जाती है तब बैनामा किया जा सकता है वहीं लेखपाल द्वारा दाखिल खारिज कर दी गई जबकि जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज हुआ दिनांक 7 जनवरी 2019 को दर्ज होती है लेखपाल द्वारा पूर्व में गलत तरीके से बगैर राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराएं लेखपाल जितेन्द्र सिंह द्वारा दाखिल खारिज कर दी गई इस तरह लोगों में चर्चा है कि क्षेत्रीय लेखपाल जितेंद्र सिंह के कारनामे पूरी तहसील में चर्चा का विषय बने हुए हैं लेकिन तहसीलदार से लेकर उप जिला अधिकारी और जिले के आला अधिकारी इस दबंग लेखपाल पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।
इसकी रिश्वतखोरी की दर्जनों शिकायतें हुई लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई वहीं दूसरी तरफ दबंग लेखपाल द्वारा किसानों को धमकाया भी जाता है और भद्दी भद्दी जातिसूचक गालियां भी देता है कई मामले रिश्वत के जिलाधिकारी से लेकर उप जिलाधिकारी तक लोगों ने लिखित शिकायत की तब भी इस पर कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई यही प्रतीत होता है कि तहसील से लेकर जिले के अधिक प्रशासनिक अधिकारी इस रिश्वतखोरी संलिप्त हैं कब होगी कार्रवाई यक्ष प्रश्न बना हुआ है।









