प्रदेश में लखनऊ सहित कई जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में बुधवार से मरीजों को दवाएं बांटने का संकट खड़ा होने जा रहा है। कारण यह है कि करीब 300 फार्मासिस्टों की ड्यूटी स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला के 9,212 पदों पर भर्ती के लिए अब 18 जून तक लिखित परीक्षा में अर्ह 17,713 अभ्यर्थियों के डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन का कार्य करेंगे। ऐसे में लखनऊ के अलावा हरदोई, रायबरेली, उन्नाव व सीतापुर में सीएचसी व पीएचसी पर आने वाले मरीजों को दवा वितरित करने में कठिनाई होगी।
आपको बता दे की फार्मासिस्ट फेडरेशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुनील यादव ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (प्रशासन) राजा गणपति आर के पत्र का विरोध किया है। उन्होंने मामले की शिकायत अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद और महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. वेद ब्रत सिंह से की है। उन्होंने कहा कि कभी भी चुनाव तक में फार्मासिस्टों की ड्यूटी नहीं लगाई गई। ताकि रोगियों को अस्पताल में आसानी से दवाएं वितरित की जा सकें।
हरदोई जिले में तो ऐसे पीएचसी हैं, जहां एकल व्यवस्था के तहत फार्मासिस्ट ही सबकुछ कार्य करते हैं। ऐसे पीएचसी में तो ताला लगाने की नौबत आ जाएगी। उधर महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. वेद ब्रत सिंह का कहना है कि विभाग ने डाक्टरों, लिपिकों व अन्य स्टाफ को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। विभागीय कार्यों के लिए आखिर बाहर से स्टाफ की व्यवस्था कैसे की जा सकती है।









