लोकसभा में उठा CAA का मुद्दा, नियम तय करने के लिए गृह मंत्रालय ने मांगा 6 महीने का समय

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नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए एक बार फिर सुर्खियों में है। कोरोना के आगमन से पहले साल 2019 के अंत से सीएए और एनआरसी कानून के चलते कई जगह विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। कोरोना के चलते महीने तक पिटारे में बंद सीएए और एनआरसी नाम का ये सांप अब एक बार फिर अपना सिर बाहर निकाल कर झांक रहा है। मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्रालय ने संसद में सीएए के नियमों को बनाने के लिए 6 महीने का समय और मांगा है। लोकसभा और राज्यसभा में मंत्रालय ने इस बात की जानकारी दी है।

लोकसभा और राज्यसभा में पास हो चुके नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को 12 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मंजूरी दे दी थी। हालांकि अभी तक इस कानून को देश में लागू नहीं किया गया है लेकिन इसे लेकर पहले दिन से ही बवाल मचा हुआ है। केंद्र सरकार सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से पीड़ित 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके हिंदू, पारसी, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों को नागरिकता देना चाहती है। इस कानून के तहत वह अवैध प्रवासी नहीं माने जाएंगे और भारत की नागरिकता हासिल करने के योग्य होंगे।

संसद में गृह मंत्रालय के जवाब के बाद अब ऐसा माना जा रहा है कि सीएए के निमय-कायदों को बनाने के लिए अभी थोड़ा और समय लग सकता है। मंत्रालय ने मंगलवार को दोनों सदनों की समितियों से मांग की है कि उन्हें 9 जनवरी 2022 तक का समय दिया जाए ताकि नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत नियमों को तैयार किया जा सके। दरअसल, लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सवाल पूछा था कि क्या केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के नियमों को अधिसूचित करने की अंतिम तारीख तय की है या नहीं। गौरव गोगोई ने नियम तय ना होने की स्थित में गृह मंत्रालय से इसके पीछे का कारण भी पूछा था।

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