लोहिया संस्थान का तुगलकी फरमान:बिना चिकित्सा अधीक्षक की अनुमति के मीडिया कवरेज पर लगाया बैन

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लखनऊ के डॉ.राम मनोहर आयुर्विज्ञान संस्थान से जुड़ा नया विवाद सामने आया। सोमवार को लोहिया संस्थान प्रशासन द्वारा जारी किए गए पत्र को लेकर नई बहस छिड़ गई। पत्र में संस्थान परिसर में मीडिया कवरेज पर पाबंदी लगाते हुए मीडिया कर्मियों को परिसर में कवरेज के लिए चिकित्सा अधीक्षक की अनुमति लेना अनिवार्य बताया गया है। साथ ही सुरक्षाकर्मियों को पत्रकारों की निगरानी के लिए मुस्तैद भी किया गया है। 30 अप्रैल को संस्थान प्रशासन द्वारा जारी किए गए इस पत्र के सामने आने के बाद से संस्थान को नई फजीहत झेलने पड़ सकती है। इससे पहले कुछ दिन पूर्व ही इमरजेंसी में मरीजों की दलाली का मामला उजागर होने के बाद भी संस्थान की जमकर किरकिरी हुई थी। इस पूरे प्रकरण में संस्थान के डॉक्टर से लेकर कर्मचारी तक की मिलीभगत सामने आई थी। बाद में शामिल चिकित्सकों के विरुद्ध तात्कालिक कार्रवाई भी हुई थी पर पूरी जांच रिपोर्ट का खुलासा नही हुआ था।

दरअसल लोहिया संस्थान में बीते कुछ महीनों से लगातार विवादों में बना हुआ है। पहले संस्थान एकाउंट्स में पैसा जमा करने को लेकर हेरा फेरी के मामला उजागर हुआ। उसके बाद दलालों से मिली भगत करके मरीजो को निजी अस्पताल भेजने के खेल का पर्दाफ़ाश हुआ। अब ताजा मामला संस्थान परिसर में मीडिया कवरेज की मनाही को लेकर है। 30 अप्रैल को पत्र जारी करके संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक ने सुरक्षा कर्मियों के सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को कहा है कि मीडिया कर्मियों को परिसर में मीडिया कवरेज के लिए चिकित्सा अधीक्षक की अनुमति लेना अनिवार्य होगी। सुरक्षाकर्मियों को पत्रकारों की सख्ती से निगरानी करनी होगी। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
यह मामला एक व्यक्ति विशेष से जुड़ा है। जो निजी स्वार्थ के कारण संस्थान की छवि को धूमिल करने के काम मे लंबे अरसे से लगे। ऐसे लोगों के नेक्सस को तोड़ने के लिए कदम उठाएं जा रहे है। बाकी अन्य किसी पत्रकार को ऐसी कोई मनाही नही है।

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