वोट बैंक की सियासत वही नाम नया, BSP ने क्यों बदला ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ का नाम?

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यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीएसपी एक बार फिर 2007 की तरह से ब्राह्मण कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आज यानि 23 जुलाई से अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है। लेकिन ये इकलौता ब्राह्मण सम्मेलन नहीं बल्कि उस बड़े अभियान की शुरुआत भर है। पार्टी की योजना प्रदेश भर में ऐसे सात ब्राह्मण सम्मेलन करने की है।

हालांकि पार्टी ने 2007 में भी ब्राह्मण सम्मेलन किया था लेकिन इस बार का सम्मेलन इस लिहाज से अलग है क्योंकि इसका नाम ब्राह्मण सम्मेलन न होकर प्रबुद्ध वर्ग सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी रखा गया है। दरअसल इस नाम बदलने के पीछे हाईकोर्ट का एक फैसला है जिसके तहत जाति के नाम पर सम्मेलन नहीं हो सकते वरना तो इस सम्मेलन का मिजाज पूरी तरह से वही है जो 2007 में हुआ करता था। ब्राह्मण सम्मेलन का नाम बदलने के पीछे इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह फैसला है जिसके तहत उसने राजनीतिक पार्टियों के जाति आधारित कार्यक्रम करने पर रोक लगा दी थी।

11 जुलाई 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पार्टियों के जाति के आधार पर कार्यक्रम प्रतिबंधित कर दिया था। न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह और न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि राजनीतिक दलों के जाति सम्मेलन समाज में आपसी मतभेदों को बढ़ाती हैं और निष्पक्ष चुनाव में बाधा बनती हैं। कोर्ट ने जाति आधारित कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाते हुए चुनाव आयोग और सरकार के साथ-साथ चार प्रमुख दलों कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा को नोटिस जारी कर जवाब देने और हलफनामा देने को कहा था।

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