सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने अपनी पेंशन छोड़ने का किया ऐलान कहा, जब कर्मचारियों को पेंशन नहीं तो सांसद, विधायकों को क्यों?

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कभी-कभी कुछ बातें पूरे समाज के लिए मिसाल बन जाती हैं और लोग अपनी लाजवाब कार्यशैली के चलते लोगों के हृदय में स्थान बना लेते हैं। पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए करीब डेढ़ दशक से आंदोलनरत सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों के पक्ष में महमूदाबाद के विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने अपनी पेंशन छोड़ने की घोषणा करके पूरे राजनैतिक समुदाय को आइना दिखाने का काम किया है।

महमूदाबाद (सीतापुर)। करीब डेढ़ साल से पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए मांग उठा रहे कर्मचारी संगठनों के समर्थन में पूर्व मंत्री व महमूदाबाद से सपा विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने अपनी पेंशन छोड़ने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विधायक की इस पहल की लोग सराहना कर रहे हैं। विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। इसमें लिखा है कि जब कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी जा रही तो सांसद, विधायक भी पेंशन के हकदार नहीं हैं।

विधायक ने इस पत्र के जरिए कहा है कि सरकार ने एक अप्रैल 2004 से सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था समाप्त कर दी है। कर्मचारियों द्वारा पिछले कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की जा रही है। अगर कर्मचारियों को पेंशन का अधिकार नहीं है तो ऐसे में नैतिक रूप से कोई भी सांसद, विधायक, मंत्री, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति पेंशन लेने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं। कर्मचारी जब इन मुद्दों पर सवाल करते हैं तो जवाब देने के लिए हमारे पास कोई उत्तर नहीं होता है।

विधायक ने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि या तो सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर दी जाए या फिर जनप्रतिनिधियों व न्यायमूर्तियों को भी नई पेंशन व्यवस्था की परिधि में लाया जाए।

विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सरकार से मांग की है कि या तो सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाय या विधायकों, सांसदों, न्यायाधीशों को भी नई पेंशन योजना के दायरे में लाया जाए। विधायक ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सेवानिवृत्त के बाद खुद भी पेंशन न लेने की घोषणा की। विधायक का तर्क है कि जब वर्ष 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों व अधिकारियों को पुरानी पेंशन से वंचित रखा जा रहा है तो जन प्रतिनिधियों को भी पुरानी पेंशन योजना से लाभांवित होने का नैतिक अधिकार नहीं है। विधायक द्वारा लिखे गए पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।

पेंशन लेने से किया इंकार
विधायक ने पत्र के माध्यम से घोषणा की है कि उनके विधायक या अन्य किसी रूप में धारित किए गए संविधानिक पद, जिस पर पेंशन मिलती हो, उसका वे त्याग करते हैं। सेवानिवृत्त के बाद भी उन्हें पेंशन का भुगतान न दिया जाए। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग व अगल-अलग प्रदेशों से कर्मचारी संगठन विधायक की इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

 

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