सैनिक होने के नाते एक शहीद के पिता का अपमान हमें हमेशा आहत करता है – सुबेदार रि पवन सिंह

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सुबेदार रि पवन सिंह संस्थापक जयहिन्द युवा सेना ने कहा कि सरकार द्वारा रूस यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन में फंसे भारतीय युवाओं को के लिए मंत्रियों को भेजना सराहनीय कदम है इससे वहां पर युवाओं की समस्यायों का हल तुरंत निकाला जा सकेगा और सुरक्षित निकालने में सफलता मिलेगी यह प्रधानमंत्री के द्वारा देशवासियों के प्रति प्रेम दर्शाता है

मुझे एक सैनिक और एन एस जी में सेवा देने का सौभाग्य प्राप्त है मुंबई हमला 26/11 में जब आतंकी हमला हुआ उसमें एन एस जी ने आपरेशन लांच किया जिसमें कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर आतंकियों से लोहा ले रहे थे तभी वह गोली लगने से शहीद हो गए जब उनके पार्थिव शरीर को गांव लाया गया और शहीद के अंतिम संस्कार में कोई मंत्री संवेदना के लिए नहीं पहुंचा इससे आहत होकर शहीद उन्नीकृष्णन के पिता ने नाराजगी जाहिर की बाद में केरल के तत्तकालीन मुख्यमंत्री संवेदना व्यक्त करने के लिए गये तो शहीद मेजर उन्नीकृष्णन के पिता को एक जवान बेटा के शहीद होने पर दुखी थे और अंतिम संस्कार में किसी के न पहुंचने से आहत थे

इससे उन्होंने ने मुख्यमंत्री से मिलने से इंकार कर दिया जो सही भी था इस पर  मुख्यमंत्री ने मुंबई हमले में शहीद कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता को कहा था कि शहीद न होते तो तुम्हारे घर कुत्ता भी न आता एक सैनिक होने के नाते एक शहीद के पिता का अपमान हमें हमेशा आहत करता रहा है यह वह भारत था, जहां यह सब नॉर्मल था। मंत्री, मुख्य मंत्री, प्रधान मंत्री सब राज्य होते थे और आम जनता तो मरने के लिए ही पैदा होती थी।

यूक्रेन से भारतीय छात्रों के रेस्क्यू मे आप देखेंगे कई सारे वीडियो वाइरल हैं। मोस्टली छात्र राजनैतिक बयान दे रहे हैं। सरकार / मोदी जी / मंत्रियों का मजाक उड़ा रहे हैं। इसके बावजूद भारत सरकार के चार मंत्री स्वयं चार देशों मे रेस्क्यू ऑपरेशन देख रहे हैं, छात्रों से मिल रहे हैं, यह जो ऊल जलूल कमेन्ट कर रहे हैं, उनकी बातें सुन भी रहे हैं और इसके बावजूद सबकी मदद कर रहे हैं। चेन्नई मे आपने देखा होगा केन्द्रीय मंत्री हवाई अड्डे के गेट पर विनम्रता से हाथ जोड़ छात्रों का अभिवादन कर रहे हैं और कई छात्र बेशर्मी और बेहूदगी से उन्हें इग्नोर करते हुवे निकल जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी मंत्री जी पर शिकन नहीं आती है और वह अंतिम छात्र के निकलने तक वैसे ही विनम्र भाव से हाथ जोड़ अभिवादन करते रहते हैं।

आप मोदी के समर्थक हों या विरोधी, पर इसमें कोई दो राय नहीं मोदी सरकार ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को भेजकर वीआईपी कल्चर को काफी हद तक समाप्त करने का प्रयास किया कि भाजपा सरकार ने वाकई मंत्रियों / जन प्रतिनिधियों को कुछ नहीं तो हम्बल अवश्य बना दिया राजनीति के चरित्र मे यह आमूल चूल परिवर्तन बहुत सराहनीय है।

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