Bangladesh violence: पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश से आ रही हिंदुओं के कत्लेआम की खबरों ने पूरे भारत में गुस्से की आग सुलगा दी है। बेकसूर हिंदुओं की लिंचिंग, उनके घरों को जलाना और सरेआम पेड़ से लटकाकर आग लगा देने जैसी दरिंदगी ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। अब यह गुस्सा सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की सड़कों पर एक सैलाब बनकर उमड़ पड़ा है।
सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता और गुवाहाटी तक, हजारों लोग भगवा चोला पहनकर मैदान में उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का तेवर इतना तल्ख है कि उन्होंने बांग्लादेशी अधिकारियों को सीधी चेतावनी दे दी है। इस बार मांग सिर्फ निंदा की नहीं है, बल्कि आर-पार की कार्रवाई की है। (Bangladesh violence) सिलीगुड़ी में प्रदर्शन के दौरान जो बयान सामने आया, उसने ढाका से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है। आखिर क्या है वो चेतावनी जिसने बांग्लादेशी दूतावासों की सुरक्षा बढ़ा दी है? और क्यों भारत का हिंदू समाज अब चुप रहने को तैयार नहीं है? आइए जानते हैं इस महा-आंदोलन की पूरी सच्चाई।
Bangladesh violence: ‘वीजा ऑफिस तो झांकी है, असली खेल अभी बाकी है!’
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में ‘बांगिया हिंदू महामंच’ के अध्यक्ष बिक्रमादित्य मंडल ने बांग्लादेशी अधिकारियों को संबोधित करते हुए एक ऐसी ललकार दी है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। (Bangladesh violence) उन्होंने साफ लहजे में कहा कि बांग्लादेश में जिस तरह हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा जा रहा है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंडल ने चेतावनी दी, “हमने पहले ही वीजा कार्यालय बंद करवा दिया है। अगर वहां हिंदुओं की रक्षा नहीं हुई, तो हम भारत में मौजूद बांग्लादेशी अधिकारियों को शांति से रहने नहीं देंगे। (Bangladesh violence) हम उन्हें चोट नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन उनके सारे काम ठप कर देंगे और उन्हें वापस उनके देश भेजने पर मजबूर कर देंगे।” यह बयान साफ करता है कि अब सब्र का बांध टूट चुका है।
दीपू दास की खौफनाक लिंचिंग
भारत में इस वक्त फैले भारी गुस्से के पीछे बांग्लादेश के मायमनसिंह जिले में हुई एक रूह कंपा देने वाली घटना है। 18 दिसंबर को 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया। इसके बाद उन्मादी भीड़ ने उसे बेरहमी से पीटा, पेड़ से लटकाया और जिंदा जला दिया। (Bangladesh violence) इसके बाद अमृत मंडल नामक एक और युवक की हत्या की खबर आई। इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रही है। आंकड़ों की मानें तो यूनुस सरकार के कार्यकाल में अब तक हिंदुओं के खिलाफ 2,900 से अधिक हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसने भारतीय समाज को सड़कों पर आने के लिए मजबूर कर दिया है।
कोलकाता से गुवाहाटी तक ‘भगवा’ क्रांति
शुक्रवार को कोलकाता में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर हजारों कार्यकर्ताओं ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कमीशन परिसर के अंदर तक घुस गए और अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया। (Bangladesh violence) वहीं, असम के गुवाहाटी में भी बंगाली यूनाइटेड फोरम ने विरोध प्रदर्शन किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में शांति और स्थिरता चाहता है, लेकिन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। भले ही बांग्लादेश की सरकार 10 गिरफ्तारियों का दावा कर रही हो, लेकिन भारत के प्रदर्शनकारी इसे महज दिखावा मान रहे हैं।










