बिहार में एक शख्स ने गुस्से में आकर एक जहरीले सांप को ही चबा डाला। वह शख्स इसलिए नाराज था, क्योंकि उसने उसे डस लिया था। मदहोशी की हालत में उस आदमी ने सांप को हाथ में पकड़ रखा था और चबाए जा रहा था। सांप भी उसे लगातार डसता जा रहा था। आखिरकार जब सांप मर गया तो उस शख्स ने उसे पास के एक पेड़ पर लटका दिया। परिवार वालों ने उसे फौरन अस्पताल चलने के लिए कहा। गांव वालों ने भी तुरंत इलाज करवाने के लिए जोर डाला। लेकिन, वह शख्स एक ही रट लगाते हुए सोने चला गया कि सांप बच्चा था, उसे कुछ नहीं होगा।
बिहार के नालंदा जिले में एक शख्स ने नशे की हालत में जहरीले सांप को ही चबा डाला। घटना जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से करीब 25 किलोमीटर दूर चंडी थाने के माधोडीह गांव की है। घटना रविवार शाम की है, जब रामा महतो नाम का 65 साल का बुजुर्ग अपने घर के बाहर बैठा था, तभी उसे एक विषैले करैत ने डस लिया। रामा नशे में धुत था। लेकिन, उस स्थिति में भी उसने किसी तरह सांप को पकड़ लिया और बिना कुछ सोचे-समझे उसने हाथ में पकड़कर उस जहरीले सांप को चबाना शुरू कर दिया।
बाद में लोगों ने बताया कि जब वह छोटे से सांप को चबा रहा था, तो वह 10 बार से भी ज्यादा बार उसके चेहरे पर डस चुका था। बाद में जब सांप मर गया तो उसने उसे पास के एक पेड़ पर डाल दिया। परिवार और गांव वालों के मुताबिक उन्होंने महतो से इलाज के लिए अस्पताल चलने को कहा, लेकिन उसने मना कर दिया और सोने के लिए चला गया। माधोडीह पंचायत समिति के अध्यक्ष भूषण प्रसाद ने मीडिया वालों को बताया कि उसका दावा था कि सांप बच्चा था और इसलिए वह जहरीला नहीं होगा। लेकिन, अगले दिन सुबह वह मृत पाया गया।
इस मामले में चंडी थाने में सांप काटने की एफआईआर दर्ज की गई है। रामा महतो के परिवार वालों ने पुलिस को दिए बयाने में जानकारी दी है कि उसने शराब (बिहार में शराब बंदी है) पी रखी थी और अपने घर के बाहर बैठा हुआ था। तभी एक छोटे से सांप (करैत) ने उसे काट लिया। उसने झपटकर उस सांप को पकड़ लिया और बदला लेने के लिए उसे चबाना शुरू कर दिया। प्रसाद ने कहा है कि सांप के काटने पर वह बोला कि ‘तुम्हारी इतनी हिम्मत! तुमने मुझे काट लिया और अब मैं तुम्हें काटूंगा। तुरंत ही उसने उस सांप को लेकर चबाना शुरू कर दिया और उसे मार डाला’
बता दें कि भारतीय उपमाद्वीप में पाए जाने वाले सामान्य करैत को नीला करैत भी कहते हैं जो सांप की बहुत ही जहरीली प्रजाति है। यह सांपों की उन चार बड़ी प्रजातियों में शामिल है, जो भारत और बांग्लादेश में ज्यादातर सर्पदंश का कारण बनते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक अकेले बिहार में हर साल करीब 4,500 हजार लोगों की मौत सांप काटने के चलते हो जाती है। एक और आंकड़े के मुताबिक बीते दो दशकों में भारत में करीब 12 लाख लोगों की सांप के काटने के चलते मौत हो चुकी है यानी हर साल औसतन 58,000 लोग सर्पदंश के शिकार हो जाते हैं।
एक शोध के मुताबिक सांप काटे जाने की सबसे ज्यादा घटनाएं बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में सामने आते हैं, जहां बीते दो दशकों में सापों की वजह से हुई मौतों में करीब 70 फीसदी मामले सामने आए हैं। सांप काटने की घटनाएं सबसे ज्यादा गर्मियों और उससे भी ज्यादा बारिश के मौसम में देखने को मिलती हैं, जब सांप अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलते हैं और इंसानों के साथ उनका सामना होता है। भारत में सांप काटने से होने वाली मौतों के लिए सबसे ज्यादा रसेल वाइपर, करैत और कोबरा जिम्मेदार हैं। बाकी मौतें सापों की 12 दूसरी प्रजातियों के कारण होती हैं









