योगी सरकार द्वारा रद्द 4 हजार उर्दू शिक्षक भर्ती के मुद्दे को उठाएगा यूथ फॉर स्वराज

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  • 4 हजार बेरोजगार की आवाज बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण
  • ये लड़ाई केवल रोजगार बचाने के नही बल्कि उर्दू भाषा को बचाने की भी है:- प्रशांत भूषण
  • योगी सरकार समझ रही की उर्दू शिक्षक भर्ती में केवल मुस्लिम अभ्यर्थी है लेकिन सच्चाई कुछ अलग है:- अंकित त्यागी
  • बेरोजगार युवाओं के पास घर चलाने के पैसे नही है ऐसे में सरकार उन्हे सुप्रीम कोर्ट ले जाकर क्या सिद्ध करना चाहती हैं?:- जाहन्वी सोढ़ा
  • अखलेश सरकार में निकली 4 हजार उर्दू शिक्षक भर्ती पार्टियों के राजनीति में फस कर रह गई, नतीजन न तो विद्यार्थियों को शिक्षक मिले और नाही युवाओं को रोजगार।

युवाओं की आवाज बने संगठन यूथ फॉर स्वराज ने बताया की 4 हज़ार उर्दू भर्ती की काउंसलिंग मार्च 2017 में पूरी हुई लेकिन 4 साल बाद भी इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिले | कारण योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी | जब अभ्यर्थी प्रक्रिया को शुरू करने की गुहार लगा कर थक गए तो अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ सरकार की एक भी दलील न चली और अभ्यर्थियों के पक्ष में सिंगल बेंच, डबल बेच, रिव्यु याचिका के फैसले आते चलें गए | लेकिन योगी सरकार उर्दू भर्ती को पूरा करना ही नही चाहती थी इसलिए कोर्ट के आदेश तक नहीं माने | जिस से तंग आकर अभ्यर्थियों ने कोर्ट के आदेश की अवमानना का केस दायर कर दिया, जहाँ सरकार को फटकार पड़ी | इस फटकार के बाद सरकार एक्शन में दिखी, लेकिन भर्ती को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि भर्ती को निरस्त करने लिये और आदेश जारी करके भर्ती को रद्द कर दिया और डबल बंच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी |

यूथ फॉर स्वराज के रोजगार फ्रंट के संयोजक अंकित त्यागी ने बताया कि अभ्यर्थियों के इस केस से साफ़ जाहिर है कि योगी सरकार जानबूझ कर उर्दू भर्ती को पूरा करना नहीं चाहती | योगी जी को लगता है की उर्दू शिक्षक भर्ती में सिर्फ मुस्लिम है और मुस्लिम अभ्यर्थियों को आगे नहीं बढ़ने देना है | लेकिन सरकार पूरी तरह से गलत है इस उर्दू शिक्षक भर्ती में हिन्दू धर्म के युवा भी सम्मिलित हैं | सरकार शिक्षा जैसे क्षेत्र में भेदभाव की नीति पर चल रही हैं।

रोजगार फ्रंट की सह-संयोजक जहान्वी सोढा का कहना है की बेरोजगार युवाओं के पास सुप्रीम कोर्ट में वकील करने के पैसे नहीं होते कम से कम सरकार को सोचना चाहिये की 4 साल से धक्के खा रहे ये बेरोजगार इतना पैसा कहां से जुटाएंगे | इसलियें हमने स्वराज अभियान के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण से बात की और अब वह इन अभ्यर्थियों की आवाज सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे |अधिवक्ता प्रशांत भूषण का कहना है की यहाँ लड़ाई मात्र 4 हज़ार उर्दू शिक्षकों के रोजगार को बचाने की नहीं है बल्कि उर्दू जैसी भाषाओं को बचाने की भी है, भाषाएँ तभी बच पाएंगी जब उन्हें पढ़ने वाले शिक्षक होंगे।उर्दू को कुछ लोग धर्म के साथ जोड़ते है लेकिन वो भूल जाते है कि भाषा प्रान्तों की होती है धर्मो की नही। उर्दू एक भारतीय भाषा है जिसके अस्तित्व को बचाना हर भारतीय का कर्तव्य है।

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