बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ के पार्टी कार्यालय में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में हिस्सा लिया। मायावती ने ये भी कहा कि वे अब उत्तर प्रदेश में सिर्फ विकास का ध्यान देंगी, पार्क और स्मारक बनाने पर नहीं। मायावती ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्राम्हणों को साधने की कोशिश की। वहीं, भाजपा पर प्रहार करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदू और मुसलमानों के पूर्वज एक ही हैं। मायावती ने भागवत के इस बयान पर कहा, ‘मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि अगर हिंदुओं और मुसलमानों के पूर्वज एक ही हैं तो आरएसएस की बीजेपी हर स्तर पर मुसलमानों के साथ सौतेला रवैया क्यों अपना रही है।’
मायावती ने कहा, मैं ब्राम्हण समाज को विश्वास दिलाती हूं कि आगामी चुनाव में अगर हम सत्ता में आते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे। अपने साथ ब्राम्हण समाज के और लोगों को शामिल करेंगे, ताकि 2007 की तरह यूपी में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आएं। मायावती ने कहा, ब्राह्मणों ने माना है कि बसपा के शासन में, ब्राह्मण समुदाय के लोग भाजपा के शासन की तुलना में बेहतर स्थिति में थे। दलित वर्ग के लोगों पर शुरू से गर्व रहा है कि उन्होंने बिना गुमराह और बहकावे में आए कठिन से कठिन दौर में भी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। ये लोग मजबूत चट्टान की तरह पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। उम्मीद है कि बीएसपी से जुड़े अन्य सभी वर्गों के लोग इनकी तरह आगे कभी गुमराह नहीं होंगे।
मायावती ने कहा, ब्राम्हण समाज के लोग भी कहने लगे हैं कि हमने बीजेपी के प्रलोभन भरे वादों के बहकावे में आकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर बहुत बड़ी गलती की है। बीएसपी की रही सरकार ने ब्राम्हण समाज के लोगों के सुरक्षा, सम्मान, तरक्की के मामले में हर स्तर पर अनेको ऐतिहासिक कार्य किए हैं। मायावती ने कहा, ‘मेरा आप सभी से अनुरोध है कि कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को कांशीराम स्मारक स्थल पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लखनऊ आएं। सभी को सभी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए’









