बाराबंकी : महिला कैदियों के हुनर के गैरजनपदों में भी कद्रदान

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हुनर बंदिशों की परवाह नहीं करता। विपरीत हालातों में भी वह उड़ान भर लेता है। कुछ ऐसा ही कर रहीं जिला कारागार की महिला कैदी। उनके बनाए जूट के थैलों की मांग लखनऊ, कानपुर सहित गैर जनपदों में भी है। इससे वह स्वावलंबी बनने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान कर रही हैं।

महिला कैदियों की ओर से बनाए गए जूट के बैग लखनऊ, कानपुर सहित अन्य जिलों को भा रहे हैं। कारागार प्रशासन महिला कैदियों की ओर से बनाए गए बैगों की मार्केटिग भी करेगा। आकर्षक थैले बना रहीं महिला कैदी : जो महिलाएं जूट के बैग बनाने में निपुण हो चुकी थीं वह पहले ही रिहा चुकी है। महिला कैदियों ने कारागार में वर्तमान में बंद कैदी रजनी, राजलक्ष्मी सिंह, नगमा, रूकसार, मंजू देवी, रेशमा, गुड़िया आदि कैदी सामान्य थैला, आफिस बैग, बोतल रखने वाले थैले, स्कूल बैग, मोबाइल रखने के लिए पाकेट बैग बना रही हैं। यह थैले जूट के हैं।

कैदियों का मेहनताना भी उनके खाते में जेल प्रशासन दे रहा है। जेलर आलोक शुक्ला ने बताया कि थैला बनाने के लिए उन्हें जूट भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जेल प्रशासन करेगा मार्केटिग : जेल प्रशासन जूट के थैलों की मार्केटिग भी करेगा। इनकी कीमत 100 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक निर्धारित की गई है। जेल प्रशासन बकायदा महिला कैदियों की ओर से बनाए गए जूट के बैगों को विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रदर्शित कराने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखेगा। इनसेट महिला कैदियों की ओर से जूट के थैलों का निर्माण किया जा रहा है। इन थैलों की मार्केटिग भी कराई जाएगी। कैदियों को मेहनताना उनके खाते में दिया जा रहा है। जूट के थैले तैयार होने से पर्यावरण की अलख भी जग रही है।

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