सिंगाही खीरी: नगर पंचायत सिंगाही के कार्यालय में ये कहावत बिल्कुल सही बैठती है कि “अंधेर नगरी चौपट राजा” क्योकि एक तरह शासन के अनेक कायदे कानून की बात की जाती है तो दूसरी तरफ कार्यालय में अजीबो गरीब मामले देखने को मिल जाते है। कही खबर चल जाती की ईओ साहब की कुर्सी खाली तो कही नगर की साफ सफाई पर प्रश्नचिन्ह लग जाते तो कहीं कुछ तो कहीं कुछ लेकिन जो अब चल रहा उसमे तो शासन की धज्जियां तो उड़ाई जा ही रही साथ साथ अनेक बातों पर प्रश्नचिन्ह भी लग रहे कि आखिर ऐसा क्यों।
हम बात कर रहे नगर पंचायत सिंगाही की जिसमे सुरेंद्र पाल सिंह नाम का कर्मचारी करीब 12 वर्षों से तैनात हैं, जो उत्तर प्रदेश शासन की जारी गाइडलाइन की 3 वर्ष से अधिक कोई भी कर्मचारी या अधिकारी एक स्थान पर कार्यरत नहीं हो सकता जिसका नगर पंचायत सिंगाही पूर्ण रूप से प्रतिपालन कर रहा है। आखिर ये कर्मचारी किस शासनात्मक व प्रशासनात्मक अधिकारी के दबाव में कई सालो से एक नगर पंचायत सिंगाही में तैनात हैं। इतने वर्षों से तैनाती के कारण नगर पंचायत से सम्बंधित अधिकारियों व शासन के ऊपर एक सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
आखिर क्या कारण है जो इतने वर्षों के उपरांत भी कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है। एक ही नगर पंचायत में काफी समय से रह कर मोटी मलाई काटते आ रहे हैं और कब तक यू ही शासन और प्रशासन के दम पर काटते रहेंगे। उत्तर प्रदेश में लगभग 450 नगर पंचायत है क्या सभी में ऐसा ही चलता है। इस बावत में निघासन एसडीम ओम प्रकाश गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि निकाय में लोकल के कर्मचारी नगर पंचायत में रह सकते हैं उनका तबादला नहीं होता जहां तक मेरी जानकारी में है।









