किसान आंदोलन पर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को लखीमपुर खीरी मामले पर टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती हैं तो कोई भी जिम्मेदारी नहीं लेता है। इस बीच केंद्र की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि लखीमपुर खीरी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आगे कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में किसान महापंचायत को जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति देने की याचिका पर सुनवाई चल रही है।
बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया, ”बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद श्री एससी मिश्र को कल देर रात यहां लखनऊ में उनके निवास पर नजरबंद कर दिया गया जो अभी भी जारी ताकि उनके नेतृत्व में पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल लखीमपुर खीरी जाकर किसान हत्याकाण्ड की सही रिपोर्ट न प्राप्त कर सके। यह अति-दुःखद व निन्दनीय।”
मायावती ने अपने अगले ट्वीट में कहा, ”यूपी के दुःखद खीरी कांड में भाजपा के दो मंत्रियों की संलिप्तता के कारण इस घटना की सही सरकारी जाँच व पीड़ितों के साथ न्याय तथा दोषियों को सख्त सजा संभव नहीं लगती है। इसलिए इस घटना की, जिसमें अब तक 8 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है, न्यायिक जांच जरूरी, बीएसपी की मांग।”
लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर भाजपा सांसद वरुण गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ का मुआवजा दिए जाने की मांग की है। भाजपा सांसद ने ट्वीटर पत्र साक्षा करते हुए लिखा, ”लखीमपुर खीरी की हृदय-विदारक घटना में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से सख्त कार्यवाही करने का निवेदन करता हूं।”









