केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने कहा है कि लखीमपुर खीरी कांड में उनका बेटा दोषी पाया गया तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। किसान संगठनों का दावा है कि केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की कार ने ही प्रदर्शनकारियों को रौंदा था, जो वहां प्रदर्शन कर रहे थे। चौतरफा दबाव झेल रहे अजय मिश्रा टेनी ने कहा है कि लखीमपुर खीरी में जिस जगह पर हिंसा हुई थी, वहां उनके बेटे की मौजूदी के एक भी सबूत मिले तो वह अपना पद छोड़ देंगे। बता दें कि इस घटना में और उसके बाद कथित जवाबी कार्रवाई में कुल 8 लोगों की मौत हुई है।
केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ने इस मामले को लेकर कहा है, ‘लखीमपुर खीरी में जिस जगह पर घटना घटी, वहां पर मेरे बेटे की मौजूदगी का एक भी सबूत सामने आया तो मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।’ रविवार को वहां हुई हिंसा में चार किसानों समेत कुल 8 लोग मारे गए थे। यह हिंसा किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई थी। किसान संगठनों का दावा है कि मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की गाड़ी से ही प्रदर्शनकारियों को रौंदा गया था। लेकिन, अजय मिश्रा लगातार दावा कर रहे हैं कि घटनास्थल पर उनका बेटा मौजूद नहीं था।
यह हिंसा तब भड़की थी, जब यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तिकुनिया पहुंचने वाले थे। यह इलाका अजय मिश्रा के पैतृक गांव के पास ही है। किसान संगठनों के दावों के अलक अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के काफिले पर हमला किया था, जिसमें उनके एक ड्राइवर के अलावा तीन और लोग मारे गए, जिसमें दो भाजपा कार्यकर्ता भी हैं। इस मामले में आशीष मिश्रा के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
अजय मिश्रा ने उन आरोपों का खंडन किया था कि जो वाहन प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से चढ़ाई गई थी, उसे उनका बेटा आशीष चला रहा था। अजय मिश्रा ने कहा है कि ‘हमारे कार्यकर्ता मुख्य अतिथि का स्वागत करने गए थे और मैं उनके साथ था। उसी समय कुछ असामाजिक तत्वों ने काफिले पर हमला कर दिया, इस दौरान कार के ड्राइवर को चोट लग गई और उसने नियंत्रण खो दिया…..जिसके परिणामस्वरूप कार पलट गई।’
बता दें कि किसान संगठनों समेत विपक्षी पार्टियां आरोपी आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग तो कर ही रहे हैं, केंद्रीय गृहराज्य मंत्री के खिलाफ भी साजिश में शामिल होने का मामला दर्ज कर उन्हें मोदी मंत्रिपरिषद से हटाने की मांग कर रहे हैं। अजय मिश्रा का लखीमपुर खीरी और आसपास के इलाकों में अच्छा प्रभाव माना जाता है। अब देखने वाली बात है कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आए इस सियासी चुनौती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह से निपटते हैं। खासकर इसलिए क्योंकि यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार से ब्राह्मणों के एक वर्ग की नाराजगी के भी दावे होते रहे हैं और जुलाई में अजय मिश्रा को इसी वजह से इतनी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई है।









