बिहार के अस्‍पतालों में कोरोना की तीसरी लहर; बड़े पैमाने पर डाक्‍टर संक्रमित, व्‍यवस्‍था पर पड़ा असर

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बिहार में कोरोनावायरस संक्रमण की तीसरी लहर की चपेट में बड़े पैमाने पर स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी भी आ गए हैं। बीते 30 दिसंबर से अब तक राज्य के करीब छह सौ डाक्‍टर और पांच हजार से अधिक अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान के भी छह सौ से अधिक डाक्‍टर व अन्‍य स्वास्थ्यकर्मी करोना संक्रमित हो गए हैं। डाक्‍टरों व स्वास्थ्यकर्मियों के बड़े पैमाने पर संक्रमित होने के कारण बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती दिख रही है।बिहार के अस्‍पतालों में सर्वाधिक संक्रमण पटना एम्‍स में फैला है। वहां अभी तक 607 स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 13 कंसल्टेंट, 53 सीनियर रेजिडैंट, 101 जूनियर डाक्‍टर, 20 इंटर्न, 303 नर्सिंग स्‍टाफ, 45 तकनीकी स्टाफ,  23 अटेंडेंट, 15 हाउस कीपिंग स्टाफ तथा 24 सेक्रेट्रिएट स्टाफ शामिल हैं। एम्स पटना के कोरोना नोडल पदाधिकारी डा. संजीव कुमार बताते हैं कि बीते पांच जनवरी से अब तक 607 डाक्‍टर व स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी कोरोना संक्रमित हुए हैं। बीते 24 घंटे में ही डाक्‍टरों सहित कुल 72 स्टाफ संक्रमित हो गए हैं।कोरोना संक्रमण का असर पटना एम्स की ओपीडी सेवा सहित पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा है। ओपीडी में अब एक दिन में 50 मरीज ही देखे जा रहे हैं और इसके लिए एक दिन पहले नंबर लगाना पड़ेगा। एम्स प्रबंधन ने कोरोना मरीजों के इलाज को सामान्‍य रखा है। पटना एम्स के नोडल पदाधिकारी डा. संजीव के अनुसार पटना एम्स में कुल 64 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान एक भी कोरोना संक्रमित की मौत नहीं हुई है।पटना के नालंदा मेडिकल कालेज एवं अस्‍पताल में अब तक 250 से अधिक डाक्‍टर व अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी कोरोना संक्रमित मिले हैं। पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में भी 100 से अधिक डाक्‍टर व स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। इससे अस्‍पतालों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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