दादा चाहते थे घर से न निकले कोई अर्थी, परिवार के 11 लोगों ने अनूठे ढंग से पूरी कर दी इच्छा

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जयपुर :  राजस्थान  के ब्यावर  की 13 साल की शिवांगी ने गुरुवार को सांसारिक मोह-माया त्याग कर संयम और सत्य पथ स्वीकार कर लिया. मुमुक्षु शिवांगी ने कहा कि मैं बचपन से ही चाहती थी. अब मुझे अच्छा महसूस हो रहा है कि मैं प्रभु के पथ पर जा रही हूं. मेरी वजह से अनेक जीवों को दुख पहुंच रहा था. परिवार के धार्मिक माहौल की वजह से शुरू से ही दीक्षा लेने का भाव था. परिवार में उनके दादा, जो अब विभुरत्नजी म.सा. के नाम से जाने जाते हैं, समेत 11 लोगों ने दीक्षा ली है. शिवांगी के दादाजी चाहते थे कि परिवार में कोई अर्थी न निकले, इसके लिए उन्होंने भी 10 साल पहले दीक्षा ली थी.

इनके बाद परिवार में कोई भी अर्थी नहीं निकली. उनके बड़े भाई रोशनलाल गन्ना ने भी देह त्यागने से पहले ही अन्न-जल त्यागने के साथ संथारा ग्रहण कर देवलोकगमन किया था. इनके बाद परिवार में लगातार दीक्षा हो रही है. इसी कड़ी में मुमुक्षु शिवांगी ने जवाहर भवन में आचार्य पद्म भूषण रत्न सुरीश्वर महाराज के मुखारविंद से दीक्षा ग्रहण की

मुमुक्षु शिवांगी ने कहा कि अब मैं प्रभु के पथ पर जा रही हूं. हर जगह पाप और दुख है. मेरी वजह से अनेक जीवों को दुख पहुंच रहा था. परिवार के धार्मिक माहौल की वजह से शुरू से ही दीक्षा लेने का भाव था. बुआ-मासी के पास गई तो बहुत अच्छा लगा कि वे कितने खुश रहते हैं, साथ ही बचपन भी दीक्षा लेने वालों के साथ ही बीता. इसी वजह से वर्ष 2019 में भी दीक्षा लेने वाली थी. ब्यावर के ही सेंटपॉल स्कूल में कक्षा चौथी तक पढ़ने वाली शिवांगी को डांस का शौक रहा है.

यही वजह है कि उन्होंने वरघोड़े में भी अपने इस शौक को पूरा करते हुए डांस किया. अपने इस शौक के बारे में कहा कि शौक था, जो आज तक पूरा कर लिया. सभी को लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहिए, यदि कोई दीक्षा ग्रहण न कर सके तो वह रोज दान-पुण्य और धर्म करे, साथ ही माता-पिता की आज्ञा का पालन करे. इससे पहले दीक्षास्थल जवाहर भवन में खुशनुमा माहौल था, मुमुक्षु शिवांगी का जन्मदिन 15 फरवरी को उसने परिवार की मौजूदगी में बुधवार को ही अपना बर्थ-डे सेलीब्रेट किया। मुमुक्षु शिवांगी के पिता का गोल्ड-सिल्वर रिफाइनरी व ट्रेडिंग का काम है.

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