अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों ने यूक्रेन में अपने लोगों को उनके हाल पर छोड़ा; लेकिन भारत ने पूरी ताकत झोंकी

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रूस के हमले से यूक्रेन में कई देशों के नागरिक फंस गए हैं. कुछ मुल्क तो ऐसे हैं, जिन्होंने अपने नागरिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया है और कहा है कि वे खुद वहां से निकलने की कोशिश करें. लेकिन भारत ने अपने नागरिकों को यूक्रेन से लाने में पूरी ताकत झोंक दी है और उन्हें स्वदेश वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. यूक्रेन में फंसे अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन गंगा’ अभियान शुरू किया है.

इसके साथ ही भारत ने यूक्रेन से भारतीय नागरिकों का निकालने के लिए पश्चिमी शहर क्राकोविक के साथ ही हंगरी में जहोनी सीमा चौकी, पोलैंड में शेयनी-मेदिका सीमा चौकियों, स्लोवाक गणराज्य में विसने नेमेके तथा रोमानिया में सुकीवा पारगमन चौकी पर अधिकारियों का दल तैनात किया है. एचटी में प्रकाशित लेख के मुताबिक यूक्रेन के पड़ोसी देशों के साथ राजनयिक पहुंच का इस्तेमाल करते हुए भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है

करीब 6,000 चीनी नागरिकों के यूक्रेन में फंसने के साथ ही बीजिंग ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए एक चार्टर्ड विमान की घोषणा की है. इसने कीव छोड़ने वाले नागरिकों से चीनी ध्वज जैसे पहचान चिह्न को दिखाने का भी अनुरोध किया है. हालांकि चीन ने अपने नागरिकों को युद्धग्रस्त यूक्रेन से निकालने की योजना फिलहाल टाल दी है, जबकि भारत का ऑपरेशन गंगा युद्धस्तर पर चल रहा है.

युद्ध प्रभावित देश में फंसे अनुमानित 900 कर्मचारियों के साथ वॉशिंगटन डीसी ने घोषणा की है कि वह अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकालने में सक्षम नहीं है. अमेरिकी दूतावास ने ट्वीट किया, “हम अमेरिकी नागरिकों से आग्रह करते हैं कि यदि वे सुरक्षित हैं, तो निजी विकल्पों से अब देश छोड़ना शुरू करें. रास्तों और खतरों पर भी विचार करें. पोलैंड से लगती यूक्रेन की कई जमीनी सीमाओं और मुख्य मोल्डावियन क्रॉसिंग को पार करने के लिए काफी लम्बी लाइन है. हम अपने नागरिकों को हंगरी, रोमानिया और स्लोवाकिया सीमा पार करने की सलाह देते हैं. यहां भी आपको घंटों इंतजार करना पड़ सकता है.”

रूसी सेना द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से कुछ दिन पहले, ब्रिटिश दूतावास ने एक सर्कुलर जारी किया था. इसमें बताया गया था कि वह युद्ध प्रभावित देश में कांसुलर पहुंच प्रदान करने में सक्षम नहीं होगा और “ब्रिटिश नागरिकों को इन परिस्थितियों में वहां सुरक्षित निकालने के लिए कांसुलर समर्थन या सहायता की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.”

जर्मन सरकार ने भी अपने नागरिकों को जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने की सूचना दी क्योंकि उन्हें वहां से निकालना मुमकिन नहीं था. बर्लिन ने अपना दूतावास बंद कर दिया है, लेकिन भारतीय दूतावास अभी भी काम कर रहा है.

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