पेपर लीक मामले पर बोले CJR अकील कुरैशी, कहा- बेरोजगारी हटाना जरूरी है

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राजस्थान के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी  ने कहा है कि बेरोजगारी का मसला  हल होना बहुत जरूरी है. नहीं तो प्रदेश में रीट  जैसे मामले बढ़ते ही रहेंगे. जोधपुर  में बाल परामर्श कौशल विकास केंद्र के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे चीफ जस्टिस ऑफ राजस्थान अकील कुरैशी ने अपने रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले ही जोधपुर में मंच से यह बयान दिया है. हालांकि अपने संबोधन से पहले रिस्ट्रिक्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनेताओं को यह सुविधा है. लेकिन ज्यूडिशरी के लिए कई नियम हैं.

मंगलवार को आयोजित हुये इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश कुरैशी ने बाल अधिकार और उनके संरक्षण के साथ उनके रोजगार की समुचित चिंता और व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में बेरोजगारी का मसला हल होना बहुत जरूरी है. नहीं तो ऐसे कृत्य होते रहेंगे और पेपर लीक होते रहेंगे. भले ही इस तरह के मामलों में मृत्युदंड का ही प्रावधान क्यों न कर दिया जाए.

उन्होंने कहा कि आज के इस प्रतिस्पर्धा के युग में सरकार को रोजगार और आजीविका के नए विकल्प ढूंढने होंगे. इस दौरान उनके साथ मंच पर तीन और न्यायाधीश भी बैठे थे. उनके साथ ही प्रदेश की कैबिनेट मंत्री महिला और बाल अधिकारिता विभाग की मुखिया ममता भूपेश भी मंच पर मौजूद थी. सीजेआर के इस बयान के बाद यह मामला सोशल मीडिया में भी छाया रहा. लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियायें दीं.

जोधपुर के मंडोर स्थित नारी निकेतन कम्पाउंड एरिया में सीजेआर अकील कुरैशी की मौजूदगी में इस भवन का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम में प्रशासनिक न्यायाधीश संदीप मेहता, विजय विश्नोई और इंद्रजीत सिंह भी उपस्थित रहे. उन्होंने अपने उद्बोधन में बाल अपचारियों को पुन: मुख्य धारा में जोड़ने पर जोर दिया. सीजेआर ने इसे समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया ताकि अल्पायु में समाज से अलग हुए युवा पुन: समाज में सम्मिलित हो सके.|

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