सपा-बसपा को छोड़ छानबे ने ‘अपना दल’ को अपनाया, इस बार किसे मिलेगा मौका

Facebook
X
WhatsApp

उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर जिला, यूं तो मां विन्ध्यवासिनी देवी के मंदिर के लिए मशहूर है, मगर राजनीतिक दृष्टि से यह जनपद धनबल और बाहुबल के झंडाबरदारों के लिए ज्यादा चर्चा में रहता है. बाहुबलियों की गहमा-गहमी इस जिले को हमेशा सुर्खियों में रखती है. जाहिर है, विधानसभा चुनाव के दौरान मिर्जापुर की हर सीट पर किन दलों और किन उम्मीदवारों के बीच सियासी संग्राम होगा, इस पर देश-प्रदेश के जानकारों की नजरें टिकी रहती हैं. इसी मिर्जापुर जिले की छानबे विधानसभा सीट का अगर जिक्र करें, और पिछले तीन चुनावों के आइने में देखें तो इस असेंबली सीट से कभी कोई उम्मीदवार दोबारा जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचा है.

साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान छानबे सुरक्षित विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी सूर्यभान और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार श्रीराम भारती के बीच टक्कर हुई थी. उस चुनाव में भारती को हार स्वीकार करनी पड़ी. सूर्यभान ने उन्हें लगभग 20 हजार वोटों से शिकस्त दी थी. इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने अपना उम्मीदवार बदल लिया, जिसका सकारात्मक परिणाम पार्टी को मिला. सपा प्रत्याशी भाई लाल कोल ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार शशि भूषण को 10 हजार से अधिक मतों से हराकर इस सीट पर समाजवादी झंडा फहराया.

मगर 2017 के विधानसभा चुनाव में छानबे सीट के मतदाताओं ने एक बार फिर अपना मन बदल लिया. इस चुनाव में भाजपा की सहयोगी अपना दल भी छानबे सीट से मैदान में उतरी. मतदाताओं ने अपना दल के उम्मीदवार राहुल प्रकाश पर भरोसा जताया. यही नहीं, प्रकाश को इस चुनाव में 1 लाख से ज्यादा वोट मिले. देखना दिलचस्प होगा कि 2022 के चुनाव में छानबे के मतदाता एक बार फिर अपना मन बदलते हैं या इस सीट पर एक दल को दोबारा जीत का तोहफा देते हैं.

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें