स्वामी प्रसाद मौर्या को फाजिलनगर सीट से मिली हार, भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा को मिली जीत

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उत्तर प्रदेश की सियासत के बड़े चेहरे और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में आए स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर जिले की फाजिलनगर विधानसभा सीट से मैदान में थे और आज उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा है.

शुरुआती रुझानों में वो पहले आगे चल रहे थे मगर हर राउंड के साथ पिछड़ते गए. वो इससे पहले पडरौना सीट से 3 बार विधायक चुने गए. हालांकि, बीजेपी छोड़ने के साथ उनकी यह सीट भी छूट गई. उनका सीधा मुकाबला इस बार भाजपा के मौजूदा विधायक गंगा सिंह कुश्वाहा के पुत्र सुरेंद्र कुमार कुश्वाहा (BJP से था जिन्होंने इस सीट पर जीत दर्ज कर ली है. फाजिलनगर विधानसभा सीट पर पिछले 10 साल से भाजपा के गंगा सिंह कुशवाहा विधायक हैं. हालांकि, इस बार पार्टी ने उनके बेटे को उतारा था.

आपको बता दें कि फाजिलनगर विधानसभा के एक बूथ के मतों की गिनती उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने रोक लगा दी थी. ये बूथ नंबर 105 राजापाकड़ है. मतदानकर्मियों की लापरवाही से चुनाव आयोग ने ये निर्णय लिया है. दरअसल, मतदानकर्मियों ने मॉकपोल को डिलीट नहीं किया था. बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. हार जीत का अंतर कम होने पर ही इस बूथ के मतों की गिनती होनी थी.कांग्रेस से मनोज कुमार सिंह और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर आए इलियास अंसारी को मौका दिया था. लोकदल, बसपा और फिर भारतीय जनता पार्टी से अपना सियासी तय करके समाजवादी पार्टी में आए उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य छठी बार विधानसभा में पहुंचने की जद्दोजहद कर रहे थे. इस सीट पर 3 मार्च को वोटिंग हुई थी.

फाजिलनगर विधानसभा सीट पर 90 के दशक में विश्‍वनाथ का दबदबा था. 1989 से लेकर 2002 तक वह लगातार चार बार विधायक रहे थे. 3 बार जनता दल के टिकट से जीते थे, जबकि 1996 का चुनाव उन्‍होंने समाजवादी पार्टी के टिकट से लड़कर जीता था. 2002 के चुनाव में जगदीश मिश्र ने पहली बार इस सीट पर भाजपा को जीत दिलाई थी. उन्होंने दिग्गज नेता विश्वनाथ को हराया था. 2007 में विश्‍वनाथ ने फिर वापसी की, लेकिन 2012 और 2017 में भाजपा के गंगा सिंह ने जीत दर्ज की.

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