पायलट महाश्वेता कैसे 800 भारतीयों को यूक्रेन से वापस लाईं,

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कोलकाता की रहने वाली महाश्वेता 4 सालों से बतौर पायलट भारतीय एयरलाइन में सेवारत हैं. एक दिन सुबह उनके पास फोन आया कि दो घंटे में सामान के साथ तैयार हो जाएं उन्हें एक मिशन पर जाना है. घरेलू फ्लाइट उड़ाने वाली महाश्वेता के लिए यह बात हैरान करने वाली थी. वह इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थीं. उनके पास इतना भी वक्त नहीं था कि वह अपने माता-पिता को सूचना दे पातीं. उन्हें यह भी नहीं पता था कि इसके बाद उनकी जिंदगी बदलने वाली है. बाद में उन्हें पता चला कि उनका चयन मिशन गंगा के लिए हुआ है. जिसे भारत सरकार ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों के लिए चलाया था.

अगले 10 दिनों से ज्यादा वक्त तक लगातार काम करते हुए महाश्वेता ने यूक्रेन से 800 से ज्यादा भारतीयों को वापस देश में लाने का काम किया. हालांकि वह इस बात का श्रेय खुद लेने से बचती हैं और उनका मानना है कि यह उनके अकेले के वश का नहीं था. यह पूरी टीम का प्रयास था. वह सौभाग्यशाली हैं, जो उन्हें इस दल का हिस्सा बनने का मौका मिला.

महाश्वेता बताती हैं कि जब उन्हें बताया गया कि यूक्रेन से भारतीयों को लाने के लिए उन्हें करीब-करीब 4000 मील की उड़ान भरनी होगी, तो वह परेशान भी थीं और डरी हुई भी थीं. उनको लग रहा था कि पता नहीं वह इस मिशन से वापस लौट पाएंगी या नहीं. उनके माता-पिता की भी वही प्रतिक्रिया थी, जो किसी भी आम माता-पिता की होती है. वे चिंतित थे और सोच रहे थे कि जब सभी यूक्रेन से लौट रहे हैं तो ऐसे में उनकी बेटी को वहां जाने की क्या जरूरत है. ऐसे में उन्हें स्व. सुषमा स्वराज के इन शब्दों ने बहुत संबल दिया, ‘अगर तुम मंगल पर भी फंसे होगे तो भारतीय दूतावास तुम्हारी मदद जरूर करेगा.’

अपने अनुभवों को साझा करते हुए महाश्वेता बताती हैं कि जब वह भारतीयों को वापस ला रही थीं तो इस घटना ने उन्हें अंदर से बदल कर रख दिया. वह खुद को अचानक अपनी उम्र से ज्यादा बड़ा महसूस कर रही थीं. जब उनके जहाज ने भारत की जमीन को छुआ और भारतीयों ने अपनी सरजमीं को देखा तो वे उनका शुक्रिया अदा करने लगे. उस वक्त उन लोगों की आंखों में कुछ ऐसा था जिसने मेरे अंदर एक नए इंसान को जन्म दिया.

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