सिंगाही खीरी: रहमत, बरकत और मगफिरत की तमन्ना के साथ रमजान का इंतजार अब पूरा होने का समय आ गया है। अल्लाह की खास रहमतों का यह महीना चांद देखने के बाद शुरू होगा। पाक रमजान के स्वागत को लेकर मस्जिदों को रंग-रोगन कर साफ कर लिया गया है। अलग-अलग मस्जिदों में तरावीह नमाज चांद रात से ही शुरू हो जाएंगी।
रमजान इसलामी साल का नौंवां महीना है। रमजान को यह विशेषता भी हासिल है कि इसी में अल्लाह की किताब कुरान शरीफ समेत चारों आसमानी किताबें नाजिल हुई हैं। जामा मस्जिद के इमाम हाफिज मो0 मुजीबुर्रहमान कहते हैं कि इस माह में हर नेकी का बदला सत्तर गुना बढ़ाकर देने का वादा किया गया है, इसलिए हमें कसरत से नेकियां करनी चाहिए। रमजान हमें गरीबों से हमदर्दी का पैगाम देता है। ज्यादा से ज्यादा गरीबों की मदद इस माह करें। सदका और जकात से गरीबों की मदद करें। कुरान की तिलावत का अहतमाम भी जरूरी है। कुरान पढ़ने की आम दिनों की खुसूसियत यह है कि हर शब्द पर दस नेकियां पढ़ने वाले को मिलती हैं।
रमजान में इनकी तादाद सत्तर गुना बढ़ा दी जाती है। इस माह का एक अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से आजादी का होता है। शबे कद्र इस महीने की वह मुबारक रात है, जिसमें की गई इबादत हजार महीनों की इबादत से भी अफजल है। रोजे की हालत में खाना-पीना छोड़ने के साथ तमाम बुरे कामों से भी दूरी बनानी चाहिए। जकात निश्चित माली हैसियत रखने वाले को माल पर साल गुजरने से पहले अदा कर देनी चाहिए। जकात के केवल पात्र को देने से अदा होगी। इस पर पहला हक करीबी रिश्तेदारों और पड़ोसियों का है। रमजान को लेकर चहल-पहल तेज हो गई है।

रोजा न रखने की भी है इजाजत
मौलाना मोहम्मद उमर ने ऐसी स्थितियां बताई गईं, जिनमें रोजा न रखने की इजाजत दी गई है। मगर छूटे हुऐ रोजे को बाद मे (कजा) यानी बाद मे रखना पडेगा यदि बीमारी से ताकत न हो या बीमारी बढ़ने का अनुमान हो, यदि गर्भवती महिला को बच्चा या उसे नुकसान होने की आशंका हो, अपने या गैर बच्चे को दूध पिलाने वाली औरत जिसका रोजा रखने से दूध कम होने से बच्चे को तकलीफ हो आदि ऐसे लोगों को यह आसानी दी गई कि वह रोजा न रखें और बाद में इनकी कजा रख लें। ऐसे लोगों को रोजा न रखने की सूरत में रमजान का अहतराम कर खुले आम खाने-पीने मेें एहतियात करनी चाहिए।
इधर, रमजान शरीफ में इबादत की खास तैयारियों को लेकर मस्जिदों में नमाजियों की बढ़ने वाली तादाद को देखते हुए तैयारियां पूरी की जाती रहीं। शाही जामा मस्जिद समेत कस्बे की तमाम मस्जिदों में रमजान शरीफ की तैयारियां मुकम्मल की गईं। रमजान को होने वाली पहली सहरी के लिए लोग फेनी व खजला वगैरा खरीदने के लिए देर शाम बाजार में निकल पड़े। हर किसी को सहरी की तैयारियों में व्यस्त देखा गया। लोगों ने अफ्तार के लिए फलों आदि की भी खरीददारी की। खास तौर पर खजूर और दूध की बिक्री काफी बढ़ गई।
इन मस्जिदों में ये पढ़ा रहे तरावीह की नमाज़
कसबे की जामा मस्जिद में हाफिज मो0 राशिद साहब, बाढियन टोला मदीना मस्जिद में हाफिज मोहम्मद अयान, झाला की मस्जिद मेें हाफिज मौलाना तौहीद भेड़ोरा की मस्जिद में हाफिज मो0 फारूक तरावीह की नमाज अदा कराएंगे।
रिपोर्ट -चंद्रमोहन








