फिलहाल कुतुबमीनार परिसर से नहीं हटेंगी देवी-देवताओं की मूर्तियां

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कुतुब मीनार गणेश मूर्ति विवाद पर साकेत कोर्ट ने ASI को निर्देश दिए हैं कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में रखी हुई भगवान गणेश की मूर्तियों को परिसर से ना हटाया जाए. इस मामले में पहले से ही पूजा अर्चना अधिकार को लेकर याचिकाकर्ता ने नई अर्जी में कहा है कि गणेश जी की मूर्तियों को लेकर नेशनल मोन्यूमेंट ऑथिरिटी के दिये सुझाव के मुताबिक नेशनल म्यूजियम या किसी दूसरी जगह विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए. इसके बजाए उन्हें इसी परिसर में हीं पूरे सम्मान के उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए।

कुव्वत इस्लाम मस्जिद में तीर्थकर ऋषभदेव, भगवान विष्णु, गणेश जी, शिव-गौरी, सूर्य देवता समेत कई हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद है. इनमे से ज़्यादातर मूर्तियां खंडित अवस्था में है. मस्जिद के बाहर लगे ASI के बोर्ड पर भी लिखा है कि ये मस्जिद 27 हिंदू जैन मंदिरों को तोड़कर उनके अवशेषो से बनाई गई हैं. इसको लेकर साकेत कोर्ट में याचिक दायर हुई थी. याचिकाकर्ता ने मस्जिद परिसर में मौजूद मूर्तियों, ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हए वहां हिंदू देवताओं की पुनर्स्थापना और पूजा-अर्चना का अधिकार दिए जाने की मांग की थी. जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान विष्णु को इस मामले में याचिकाकर्ता बनाया गया था।

मस्जिद परिसर के अंदर मौजूद देवी देवताओं के पूजा अर्चना के अधिकार की मांग अभी कोर्ट में पेंडिंग ही है।लेकिन इसी बीच नेशनल मोन्यूमेंट ऑथोरिटी के चेयरमैन तरुण विजय ने संस्कृति मंत्रालय को लिखे पत्र में वहां मौजूद गणेश जी की मुर्तियो को वहां से हटाने की मांग की थी. 25 मार्च को लिखे पत्र में उन्होंने कहा था कि ये बहुत शर्मनाक बात है कि मस्जिद परिसर के अन्दर भगवान गणेश जी की मूर्तियां बेहद अपमानजनक स्थिति में रखी है।एक मूर्ति ऐसी जगह है, जहां लोगो के पैर लगते है, वही दूसरी जाली में बंद है, उन्हें वहां से हटाकर नेशनल म्यूजियम जैसी दूसरी जगह रखा जा सकता है।

वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि ये वाकई शर्मनाक बात है कि करोड़ों हिंदुओ की आस्था के प्रतीक भगवान गणेश की मूर्तियां मस्जिद परिसर में इस कदर दयनीय अवस्था में पड़ी है. इन मूर्तियों को NMA की ओर से दिए गए सुझाव के मुताबिक किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने के बजाए मस्जिद परिसर के अन्दर ही सम्मानजनक स्थिति में रखा जाना चाहिए. याचिकाकर्ताओ का कहना था कि उन्होंने इस जगह हिंदू देवी देवताओं की पुर्नस्थापना और पूजा अर्चना के अधिकार को लेकर याचिका दायर की है। इस लिहाज से वहां मौजूद तमाम मूर्तियां केस प्रॉपर्टी है।

लिहाजा ASI को कोई अधिकार नहीं बनता कि वो मूर्तियों को वहां से कोई दूसरी जगह ले जाए, बल्कि उसकी जिम्मेदारी बनती है कि मूर्तियों को सम्मान जनक अवस्था में रखा जाए. साकेत कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों की दलील से सहमति जताते हुए ASI को निर्देश दिया कि मस्जिद परिसर से भगवान गणेश की मूर्तियों को न हटाया जाए।

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