तलाक-ए-हसन और एकतरफा तलाक पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक समान कानून की मांग, पीड़‍िता ने दी ये दलीलें

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तलाक-ए-हसन और एकतरफा तलाक के अन्य सभी रूपों को असंवैधानिक और गैरकानूनी घोषित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार को बिना धार्मिक भेदभाव के तलाक के समान आधार और समाज के सभी वर्गों के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
यह याचिका एक मुस्लिम महिला ने दायर की है। महिला ने पत्रकार होने के साथ ही एकतरफा अतिरिक्त न्यायिक तलाक-ए-हसन की शिकार होने का दावा किया है। महिला ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि तलाक-ए-हसन और एकतरफा तलाक के अन्य रूपों की प्रथा ना तो मानव अधिकारों और ना ही लैंगिक समानता के आधुनिक सिद्धांतों के अनुरूप है।
याचिका में कहा गया है कि कई इस्‍लामिक देशों में ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाई जा चुकी है। इस तरह की प्रथाओं से सामान्य रूप से भारतीय समाज… खास तौर पर मुस्लिम महिलाओं को मुश्किलें पैदा हो रही हैं। ऐसी प्रथाओं ने महिलाओं और उनके बच्चों के जीवन को भी संकट में डाला है। विशेष रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए ऐसी प्रथाएं समस्‍या की वजह हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता पीड़‍िता की शादी 25 दिसंबर 2020 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार एक व्यक्ति से हुई थी जिसका एक लड़का है। पीड़‍िता का दावा है कि उसके माता-पिता को दहेज देने के लिए मजबूर किया गया था। दहेज नहीं मिलने पर महिला को प्रताड़ित किया गया। याचिकाकर्ता का यह भी दावा है कि उसके पति और उसके परिवार के सदस्यों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह गंभीर रूप से बीमार हो गई।

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